150 करोड़ प्रतिबंधित प्लास्टिक होलोग्राम राज्य के पर्यावरण में घोलेंगे जहरः कांग्रेस – uttarakhandawaaz.in

150 करोड़ प्रतिबंधित प्लास्टिक होलोग्राम राज्य के पर्यावरण में घोलेंगे जहरः कांग्रेस

प्रधानमंत्री के आदेशों को दरकिनार कर प्रतिबंधित प्लास्टिक होलोग्राम की प्रक्रिया जारीः करन माहरा
देहरादून ,

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष करन माहरा ने कहा है कि आबकारी विभाग ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आदेशों को दरकिनार कर प्रतिबंधित प्लास्टिक होलोग्राम की प्रक्रिया जारी है और 150 करोड़ प्रतिबंधित प्लास्टिक होलोग्राम राज्य के पर्यावरण में जहर घोलने का काम करेंगे। आज कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन पत्रकारों से वार्ता करते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 15 अगस्त 2019 के लाल-किले से भाषण के अंश को दिखाया जिसमें उन्होंने पूरे देश से सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश पर केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा उत्तराखंड के आबकारी विभाग को 18 जनवरी 2024 पर प्लास्टिक युक्त होलीग्राम की शिकायत पर तीन हफ्ते में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिये, किन्तु तीन हफ्ते बीत जाने के बाद भी आबकारी विभाग ने केंद्र सरकार के आदेशों पर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की और आश्चर्यजनक रूप से प्रतिबंधित एसयूपी नीति पर प्रधानमंत्री कार्यालय के आदेशों को दरकिनार कर 150 करोड़ प्लास्टिक होलोग्राम की प्रकिया जारी है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के पर्यावरण को प्ततमअमतेपइसम स्वेे के लिए आबकारी विभाग उत्तराखंड द्वारा प्रतिबंधित – बैन सिंगल यूज प्लास्टिक (एसयूपी) का 150 करोड़ होलोग्राम (लेबल्स) के टेंडर में घोर अनियमितताओं पर तथ्यों के साथ पूर्व में पर्यावरणविद पद्मविभूषण सुंदर लाल बहुगुणा के जन्मदिवस पर जनवरी माह 2024 को भी यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह कार्य केंद्र सरकार की प्रतिबंधित सिंगल उपयोग प्लास्टिक बैन की नीति, प्रधानमंत्री कार्यालय व नेशनल ग्रीन ट्राईब्यूनल नई दिल्ली द्वारा जारी एसयूपी के प्रतिबंध की गाइडलाइंस के बिलकुल विपरीत है। उन्होंने कहा कि आबकारी विभाग उत्तराखंड ने 20 नवम्बर 23 को उत्तराखंड में शराब की बोतलों में लगने वाली होलोग्राम का टेंडर निकाला जिसमें उन्होंने पॉलिस्टर प्लास्टिक युक्त 36 माइक्रोन का होलोग्राम की मुख्य मांग रखी जबकि केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय कार्यालय द्वारा 30 जून 2022 को जारी गाइडलाइन के अनुसार सिंगल यूज प्लास्टिक 100 माइक्रोन से कम पर संपूर्ण रूप से प्रतिबंधित है और इन बिंदुओं पर कांग्रेस नेता अभिनव थापर ने 23 दिसम्बर 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र दिया और उत्तराखंड में 150 करोड़ प्रतिबंधित नाॅन बायोडीग्रेडेबल प्लास्टिक से होने वाले नुकसान के बारे मे अवगत कराया और इस टेंडर को निरस्त करने के लिए प्रत्यावेदन दिया। उन्होंने कहा कि इस विषय पर प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा संज्ञान लिया गया और केंद्र के पर्यावरण मंत्रालय एमओईएफ द्वारा एसयूपी बैन की गाइडलाइन के अनुसार तीन हफ्ते में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश 18 जनवरी 2024 को दिए किन्तु आबकारी विभाग केंद्र के आदेशों को दरकिनार कर पांच वर्षो में 150 करोड़ प्लास्टिक लेबल के हजारों कुंतल प्लास्टिक के टेंडर पर हैरतअंगेज रूप से कार्य की प्रक्रिया गतिमान है। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक के इस जहर को घोलने वाले इस टेंडर को तत्काल निरस्त कर जांच बिठाई जाये, उन्होंने कहा कि दोषी अफसरों पर कार्यवाही की जाये और किन कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए इतना बड़ा खेल हमारे पर्यावरण हिमालय, ग्लेशियर और नदियों को ताक पर रख कर किया जा रहा है, उनका भी नाम जनता के सामने लाया जाए। इस अवसर पर करन माहरा ने कहा कि कैबिनेट में विधानसभा के बजट सत्र को गैरसैंण में आयोजित ना किये जाने के फैसले को भी दुर्भाग्य पूर्ण बताया और कहा कि यह फैसला जनभावना का अपमान करने वाला है और राज्य आन्दोलन में पर्वतीय क्षेत्र के विकास का जो सपना देखा गया था उसको भी चकनाचूर करने वाला है। उन्होंने कहा कि राज्य आन्दोलन में शहीद हुए शहीदों की शहादत का भी यह अपमान है और राज्य के आन्दोलनकारी भी इस फैसले से आहत हैं। उन्होंने कहा कि वह सरकार से कहना चाहते है कि विधानसभा का बजट सत्र अगर फरवरी मार्च में भी गैरसैण में आयोजित नहीं किया जा रहा है तो कब आयोजित होगा और इसके बाद सरकार पिछले वर्षो की तरह चारधाम यात्रा का बहाना बनाकर गैरसैंण में सत्र अयोजित करने से भागेगी। उन्होंने कहा कि सरकार इस जनविरोधी फैसले को बदलकर जनभावनाआंे का सम्मान करें। इस अवसर पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता अभिनव थापर ने कहा की उत्तराखंड की गंगा यमुना जैसी तमाम नदियों, वन आदि में प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक के नाॅन बायोडिग्रेडेबल 150 करोड़ प्लास्टिक लेबल पर्यावरण में जहर की तरह घुल जाएंगे। उन्होंने कहा कि इन होलोग्राम से न सिर्फ उत्तराखंड के पर्यावरण को 300 वर्षों तक घनघोर आईरीवर्सिबल लौस अपूर्णीय क्षति होने वाली है बल्कि प्रदेश के वन्य जीव, नदियों, झीलें, ग्लेशियर और अन्य पर्यावरणीय स्त्रोत्र पर गंभीर तरीके से संकट खड़ा होने वाला है। इस अवसर अनेक कांग्रेसजन शामिल रहे।

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