11 से 21 अक्टूबर तक रेसकोर्स स्थित श्री गुरु नानक मैदान में होगा आयोजन, 20 अक्टूबर को होगा रावण दहन
देहरादून ,
उत्तराखंड की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के उद्देश्य से आयोजित होने वाले ‘भव्य रामलीला महोत्सव 2026’ का शुभारंभ शुक्रवार को घंटाघर स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर से भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952, देहरादून की ओर से आयोजित इस यात्रा में धार्मिक झांकियों, पारंपरिक वाद्य यंत्रों और उत्तराखंड की लोक संस्कृति की आकर्षक झलक देखने को मिली।
रेसकोर्स स्थित श्री गुरु नानक मैदान में 11 से 21 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले इस महोत्सव में रामलीला मंचन के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन संध्या, मेला और पारंपरिक पुतला दहन प्रमुख आकर्षण रहेंगे। कलश यात्रा में भगवान राम दरबार, भगवान वाल्मीकि जी, वानर सेना और जामवंत जी की झांकियों ने श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया। राम झांकी में 10 फीट ऊंचे हनुमान जी और 12 फीट ऊंचे जामवंत जी की प्रतिमाएं विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं।
पुष्प वर्षा और प्रसाद वितरण से हुआ स्वागत
कलश यात्रा का विभिन्न स्थानों पर श्रद्धा और उत्साह के साथ स्वागत किया गया। जंगम शिवालय में टपकेश्वर के महंत श्री 108 कृष्णागिरी जी महाराज ने पुष्प वर्षा कर यात्रा का अभिनंदन किया। वहीं, पलटन बाजार में कालिका मंदिर समिति की ओर से प्रसाद वितरित किया गया। इसके बाद कलश यात्रा रेसकोर्स स्थित श्री गुरु नानक मैदान पहुंची, जहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ इसका समापन हुआ। इस अवसर पर श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों ने प्रभु श्रीराम के भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया।
पुरानी टिहरी की ऐतिहासिक रामलीला को मिल रहा नया स्वरूप
श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952, देहरादून के अध्यक्ष अभिनव थापर ने कहा कि पुरानी टिहरी में वर्ष 1952 से चली आ रही ऐतिहासिक रामलीला परंपरा को टिहरी के जलमग्न होने के बाद देहरादून में पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया गया है। इसी उद्देश्य से रामलीला का आयोजन भव्य स्वरूप में किया जा रहा है, ताकि उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सके।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में आयोजित रामलीला को विभिन्न माध्यमों से 85 लाख से अधिक दर्शकों ने देखा था। इस वर्ष डिजिटल माध्यमों के जरिए एक करोड़ से अधिक दर्शकों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है।
डिजिटल माध्यमों से होगा रामलीला का सीधा प्रसारण
इस वर्ष महोत्सव में आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए डिजिटल लाइव टेलीकास्ट सिस्टम के माध्यम से रामलीला का सीधा प्रसारण किया जाएगा। डिजिटल स्क्रीन और अन्य ऑनलाइन माध्यमों से कार्यक्रम को अधिक से अधिक दर्शकों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी।
महोत्सव में उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले कलाकार अपनी लोक कला और संस्कृति की प्रस्तुतियां देंगे। गढ़वाल के ढोल-दमाऊं, जौनसार की रणसिंगा परंपरा और कुमाऊं के छोलिया नृत्य के माध्यम से प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को मंच प्रदान किया जाएगा।
11 अक्टूबर को पंचतत्व बैंड का कॉन्सर्ट, 20 अक्टूबर को रावण दहन
महोत्सव के अंतर्गत 11 अक्टूबर को शाम छह बजे रेसकोर्स स्थित श्री गुरु नानक मैदान में पंचतत्व बैंड का कॉन्सर्ट आयोजित किया जाएगा। इसमें उत्तराखंड की लोक संस्कृति और संगीत को आधुनिक अंदाज में प्रस्तुत किया जाएगा। इसके अलावा भजन संध्या, सांस्कृतिक कार्यक्रम और भव्य मेले का भी आयोजन होगा।
आयोजकों के अनुसार, 20 अक्टूबर को रावण, कुंभकर्ण, मेघनाद और लंका के पारंपरिक पुतला दहन का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। महोत्सव का उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर स्थापित करना है।
कलश यात्रा में गणमान्य लोगों ने की सहभागिता
कलश यात्रा में समिति अध्यक्ष अभिनव थापर, पूर्व विधायक राजकुमार, रेसकोर्स गुरुद्वारे के अध्यक्ष बलबीर सिंह बन्नी, कालिका मंदिर समिति के संजय आनंद, बजरंग दल के विकास वर्मा, संजय कनौजिया कद्दू, पवनदीप कुकरेजा, पार्षद अर्जुन सोनकर, वीरेंद्र बिष्ट, मुकेश सिंघल, दून वैली व्यापार मंडल के पंकज मेसोन, सुशील अग्रवाल, जावेद आलम, अमित पंत, दुर्गा भट्ट, अजय पैन्यूली, गिरीश पैन्यूली, नीता बहुगुणा, शशि पैन्यूली और नरेश कुमार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।
भव्य रामलीला महोत्सव के माध्यम से देहरादून में पुरानी टिहरी की ऐतिहासिक रामलीला परंपरा को आगे बढ़ाने और उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति को नई पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।