जल संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम: उत्तराखंड में नई जल मूल्य दरें लागू

देहरादून ,

अनियंत्रित भू-जल दोहन पर लगेगी लगाम

उत्तराखंड शासन ने जल संसाधनों के संरक्षण और भू-जल के अनियंत्रित दोहन पर रोक लगाने के उद्देश्य से नई जल मूल्य नीति लागू कर दी है। सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण अनुभाग द्वारा जारी यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।

मनीष कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि नई दरें राज्य की सभी औद्योगिक इकाइयों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और रेजिडेंशियल अपार्टमेंट्स जैसे गैर-कृषि उपयोगकर्ताओं पर लागू होंगी। हालांकि कृषि कार्यों और सरकारी पेयजल आपूर्ति को इस शुल्क व्यवस्था से पूरी तरह मुक्त रखा गया है।

क्षेत्रवार तय हुई शुल्क संरचना

शासन ने भू-जल दोहन की स्थिति के आधार पर क्षेत्रों को सुरक्षित, अर्ध-गंभीर, गंभीर और अति-दोहित श्रेणियों में विभाजित कर अलग-अलग शुल्क निर्धारित किए हैं। विशेष रूप से सॉफ्ट ड्रिंक और मिनरल वाटर प्लांट जैसे उद्योगों, जो भू-जल का उपयोग कच्चे माल के रूप में करते हैं, उनके लिए अधिक दरें तय की गई हैं।

रेजिडेंशियल सोसायटियों को राहत

नई नीति के तहत रेजिडेंशियल सोसायटियों को प्रति माह 25 घनमीटर तक भू-जल उपयोग निशुल्क मिलेगा। इसके बाद निर्धारित दरों के अनुसार शुल्क देना होगा।

साथ ही, 300 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले सभी भूखंडों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।

जल संरक्षण अपनाने वालों को मिलेगा लाभ

पानी की बचत और रिसाइकिलिंग तकनीक अपनाने वाली इकाइयों को कुल जल मूल्य शुल्क में 10 प्रतिशत की विशेष छूट दी जाएगी। इसके अलावा सभी व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए 5,000 रुपये शुल्क के साथ अनिवार्य पंजीकरण और अधिकृत जल मीटर लगाना भी जरूरी होगा।

नियम तोड़ने वालों पर सख्ती

बिना अनुमति भू-जल दोहन करने वाली इकाइयों पर शासन ने कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया है। ऐसे मामलों में दोगुनी दर से जुर्माना वसूला जाएगा। इसके अलावा जल मूल्य दरों में हर वर्ष 1 अप्रैल से स्वतः 5 प्रतिशत वृद्धि भी लागू होगी।

अति-दोहित क्षेत्रों में नए उद्योगों पर रोक

पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए अति-दोहित क्षेत्रों में किसी भी नए बड़े उद्योग को भू-जल दोहन की अनुमति नहीं दी जाएगी। जल मूल्य संग्रहण और बिलिंग की पूरी जिम्मेदारी सिंचाई विभाग को सौंपी गई है।

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