हेमकुंट साहिब यात्रा 2026: बर्फ हटाने का कार्य शुरू, सेना और सेवादार जुटे

चमोली ,

गोविंदघाट से घंगरिया तक श्री हेमकुंट साहिब ट्रेक मार्ग को खोलने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू हो गई है। गुरुद्वारा श्री हेमकुंट साहिब प्रबंधन ट्रस्ट के सेवादारों और भारतीय सेना की 418 माउंटेन ब्रिगेड की संयुक्त टीम ने अरदास के बाद बर्फ हटाने का कार्य प्रारंभ कर दिया है।

इस अभियान के तहत 9(1) माउंटेन ब्रिगेड की 418 इंडिपेंडेंट फील्ड कंपनी की एक टुकड़ी, सूबेदार के नेतृत्व में गोविंदघाट से रवाना हुई। ट्रस्ट के सीईओ सरदार सेवा सिंह ने टीम को विधिवत विदाई दी। इससे पूर्व एक रेकी टीम द्वारा किए गए सर्वेक्षण में हेमकुंट साहिब और अटलकोटी ग्लेशियर क्षेत्र में 8 फीट से अधिक बर्फ जमी होने की पुष्टि हुई थी।

अब यह संयुक्त दल घंगरिया में ठहरकर प्रतिदिन ऊपरी क्षेत्रों की ओर बढ़ते हुए भारी बर्फ को काटकर ट्रेक मार्ग को सुरक्षित बनाने का कार्य करेगा। उम्मीद जताई जा रही है कि लगातार प्रयासों से अगले तीन सप्ताह में पूरा मार्ग साफ कर लिया जाएगा।

प्रशासन और ट्रस्ट की तैयारियों के अनुसार, श्री हेमकुंट साहिब के कपाट 23 मई 2026 को श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे, जबकि प्रथम जत्था 20 मई 2026 को ऋषिकेश से रवाना होगा।

समुद्र तल से लगभग 4,632 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हेमकुंट साहिब गढ़वाल हिमालय का एक अत्यंत पवित्र सिख तीर्थस्थल है। सात बर्फीली चोटियों से घिरा यह स्थल अपनी शांत झील और अद्वितीय प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है।

सिख परंपरा के अनुसार, यह स्थान गुरु गोबिंद सिंह के पूर्व जन्म की तपस्थली माना जाता है और इसका उल्लेख दसम ग्रंथ में भी मिलता है। यही कारण है कि यह स्थल न केवल सिख समुदाय बल्कि सभी श्रद्धालुओं के लिए आस्था और आध्यात्मिक शांति का केंद्र है।

ट्रस्ट के अध्यक्ष सरदार नरेंद्र जीत सिंह बिंद्रा ने भारतीय सेना के निरंतर सहयोग और सेवा भाव के लिए आभार व्यक्त करते हुए सभी सेवादारों के समर्पण की सराहना की है।

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