उत्तरकाशी ,
खीर गंगा के रौद्र रूप की चपेट में आए धराली-हर्षिल आपदा क्षेत्र में मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश तेज हो गई है। एनडीआरएफ ने पहली बार भारत में अपने विशेष के-9 शव खोजी डॉग धराली में उतारे हैं। ये वही खोजी कुत्ते हैं जिन्होंने तुर्किए और म्यांमार में आए भूकंप के दौरान सैकड़ों लोगों को खोजने में अहम भूमिका निभाई थी।
एनडीआरएफ के डीआईजी गंभीर सिंह चौहान के मुताबिक, छह कुत्तों की टीम यहां तैनात है, जिनमें दो को विशेष प्रशिक्षण मिला है। ये कुत्ते मलबे में दबे मानव अवशेषों की गंध सूंघकर संकेत देते हैं, जिसके बाद उसी क्षेत्र में मलबा हटाने का काम शुरू किया जाता है।
एसडीआरएफ, आईटीबीपी और अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय कर चल रहे इस सर्च ऑपरेशन में अब तक 700 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। वहीं, 15 फीट तक गहरे मलबे में दबे लोगों को खोजने के लिए उन्नत तकनीक का सहारा लिया जा रहा है।
एसडीआरएफ की टीमें थर्मल इमेजिंग कैमरा और विक्टिम लोकेटिंग कैमरा का इस्तेमाल कर रही हैं। यह उपकरण लंबी छड़ के सिरे पर लगे कैमरे के जरिए संकरी जगहों में झांककर फंसे लोगों की पहचान करने में मदद करता है।
इसके साथ ही, ड्रोन के माध्यम से प्रभावित क्षेत्र का हवाई सर्वे किया जा रहा है, ताकि मुश्किल स्थानों की पहचान कर वहां तेजी से सर्चिंग की जा सके।