“मेरा धर्म करुणा है” – सीएम ने उद्धृत किया दलाई लामा का संदेश, तिब्बती समाज को राज्य सरकार का पूर्ण सहयोग
देहरादून,
क्लेमेनटाउन स्थित तिब्बती बौद्ध केंद्र में रविवार को आयोजित दलाई लामा जी के 90वें जन्मदिवस समारोह में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भाग लेकर तिब्बती समुदाय एवं समस्त देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर उन्होंने तिब्बती समाज की सांस्कृतिक विरासत और वैश्विक शांति में योगदान की सराहना करते हुए विकास संबंधी दो अहम घोषणाएं भी कीं।
📣 मुख्यमंत्री की घोषणाएं:
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बुद्धा टेंपल मार्ग का चौड़ीकरण किया जाएगा।
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तिब्बती श्मशान घाट में टिन शेड का निर्माण होगा।
सीएम ने कहा कि इन कार्यों से न केवल स्थानीय तिब्बती समुदाय को सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि यह राज्य सरकार की समावेशी विकास नीति का भी प्रमाण है।
🌏 दलाई लामा के विचारों का सम्मान:
मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में कहा:
“दलाई लामा जी ने शांति, अहिंसा और करुणा की जिस राह पर दुनिया को चलाया है, वह आज के तनावपूर्ण समय में अत्यंत प्रासंगिक है। वह न केवल तिब्बती समाज के बल्कि समस्त मानवता के पथप्रदर्शक हैं।”
उन्होंने विशेष रूप से दलाई लामा जी के उद्धरण “मेरा धर्म करुणा है” को दोहराते हुए उन्हें विश्व का सच्चा आध्यात्मिक गुरु बताया।
🤝 राज्य सरकार की प्रतिबद्धता:
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड, जिसे देवभूमि कहा जाता है, ने सदैव तिब्बती समाज को प्रेम, सम्मान और संरक्षण दिया है।
उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार तिब्बती समुदाय के सांस्कृतिक, शैक्षिक और सामाजिक विकास में हर संभव सहयोग देती रहेगी।
🙏 स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना:
मुख्यमंत्री ने ईश्वर से प्रार्थना करते हुए कहा:
“परम पूज्य दलाई लामा जी को उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु प्राप्त हो ताकि वे भावी पीढ़ियों को भी अपने अमूल्य विचारों से मार्गदर्शन देते रहें।”
🧑🤝🧑 उपस्थित गणमान्य अतिथि:
इस अवसर पर अनेक वरिष्ठ अधिकारी और समाजसेवी उपस्थित रहे:
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कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज
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विधायक विनोद चमोली
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वक्फ बोर्ड अध्यक्ष शादाब शम्स
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पूर्व मुख्य सचिव सुभाष कुमार
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सांगयम सोनम पालडन, डॉ. त्सावांग फुंटसोक, तेनजिंग चोएफेल
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महेश पांडे, सरदार इंद्रपाल कोहली, राजेश मित्तल सहित तिब्बती समुदाय के अनेक लोग
📌 निष्कर्ष:
यह आयोजन सांस्कृतिक सौहार्द, आध्यात्मिक श्रद्धा और सामाजिक समरसता का प्रतीक बन गया।
दलाई लामा जी का जीवन और दर्शन आज भी लोगों को करुणा, सहिष्णुता और शांति की राह पर चलने के लिए प्रेरित करता है।