राजकीय महाविद्यालयों में 117 योग प्रशिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू, 1 अगस्त से होंगे साक्षात्कार – uttarakhandawaaz.in

राजकीय महाविद्यालयों में 117 योग प्रशिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू, 1 अगस्त से होंगे साक्षात्कार

आउटसोर्सिंग के माध्यम से होगी तैनाती, मेरिट और इंटरव्यू के आधार पर होगा चयन

देहरादून, 
उत्तराखंड के राजकीय महाविद्यालयों में योग शिक्षा को मजबूती देने के उद्देश्य से लंबे समय से लंबित पड़ी 117 अस्थायी योग प्रशिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया आखिरकार शुरू कर दी गई है। उच्च शिक्षा विभाग और कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग के संयुक्त प्रयास से रोजगार प्रयाग पोर्टल पर प्राप्त 640 आवेदन के आधार पर यह नियुक्ति प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है।


📅 भर्ती प्रक्रिया की प्रमुख तिथियां:

  • 25 जुलाई 2025: मेरिट सूची जारी होगी

  • 1 से 8 अगस्त 2025: जनपदवार साक्षात्कार आयोजित

  • 11 अगस्त 2025: चयनित प्रशिक्षकों की महाविद्यालयों में तैनाती


📌 चयन प्रक्रिया की रूपरेखा:

  • 100 अंकों पर आधारित मेरिट निर्धारण, जिसमें:

    • हाईस्कूल और इंटरमीडिएट: 10-10 अंक

    • स्नातक डिग्री: 20 अंक

    • योग में PG डिप्लोमा/MA: 30 अंक

    • अनुभव (प्रति वर्ष 3 अंक, अधिकतम 30 अंक)

  • साक्षात्कार: 50 अंकों का

  • 3 गुणा अभ्यर्थियों की सूची सेवायोजन विभाग द्वारा भेजी जाएगी

  • चयन के बाद प्रत्येक अभ्यर्थी को उनके द्वारा चुने गए 2 जनपदों में से किसी एक महाविद्यालय में तैनाती दी जाएगी।


👩‍🏫 आरक्षण वर्ग के लिए विशेष व्यवस्था:

जिन श्रेणियों में तीन गुणा योग्य अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं हैं, वहां सभी पात्र अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए शामिल किया जाएगा। यह कदम समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।


🧘 छात्रों को मिलेगा सीधा लाभ:

इन प्रशिक्षकों की तैनाती से राज्य के महाविद्यालयों में पढ़ने वाले हजारों छात्र-छात्राएं योग की नियमित शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे, जिससे:

  • शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होगा

  • योग के व्यावसायिक अवसरों के प्रति भी जागरूकता बढ़ेगी

  • आत्म अनुशासन, ध्यान और संतुलन जैसे जीवन कौशल विकसित होंगे


🗣️ विभाग का संदेश:

“यह सिर्फ एक भर्ती प्रक्रिया नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा में समग्र विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है। छात्रों को किताबी ज्ञान के साथ योग की विद्या भी सिखाई जाएगी, जिससे वे शारीरिक रूप से सशक्त और मानसिक रूप से संतुलित बन सकें।”
— उच्च शिक्षा विभाग, उत्तराखंड

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