नैनीताल,
उत्तराखंड सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस नीति के तहत एक और बड़ी कार्रवाई सामने आई है। विजिलेंस टीम ने नैनीताल में मुख्य कोषाधिकारी और कोषागार के एकाउंटेंट को ₹1.20 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। दोनों अधिकारी सरकारी भुगतान के एवज में यह राशि ले रहे थे।
यह कार्रवाई मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के उस अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत राज्य में सरकारी तंत्र से भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है।
🔎 बीते तीन वर्षों में बड़ी कार्रवाई:
विजिलेंस और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की सख्ती का परिणाम है कि अब तक 150 से अधिक आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं, जिनमें कई उच्च पदस्थ अधिकारी भी शामिल हैं।
⚖️ प्रमुख भ्रष्टाचार केस जिनमें त्वरित कार्रवाई हुई:
| अधिकारी/कर्मी | विभाग/स्थान | रिश्वत की राशि | स्थिति |
|---|---|---|---|
| मुख्य कोषाधिकारी व एकाउंटेंट | कोषागार, नैनीताल | ₹1.20 लाख | रंगे हाथ गिरफ्तार |
| AE | लोक निर्माण विभाग, नैनीताल | ₹10,000 | पकड़े गए |
| JE | बिजली विभाग, हरबर्टपुर | ₹15,000 | गिरफ्तार |
| उप निरीक्षक व मुख्य आरक्षी | एलआईयू, रामनगर | – | गिरफ्तार |
| कर्मचारी | आरटीओ, कोटद्वार | ₹3,000 | गिरफ्तार |
| AGM | रोडवेज, काशीपुर | ₹90,000 | गिरफ्तार |
| खंड शिक्षा अधिकारी | खानपुर | ₹10,000 | गिरफ्तार |
| असिस्टेंट कमिश्नर | जीएसटी, देहरादून | ₹75,000 | गिरफ्तार |
| जिला आबकारी अधिकारी | रुद्रपुर | ₹1 लाख (मांगा गया) | गिरफ्तार |
| कानूनगो | पौड़ी | ₹15,000 | गिरफ्तार |
| कर्मचारी | सीएम हेल्पलाइन, हरिद्वार | – | गिरफ्तार |
🛑 सरकार का संदेश स्पष्ट:
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कई बार सार्वजनिक मंचों से यह दोहरा चुके हैं कि “भ्रष्टाचार करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह किसी भी स्तर पर हो।” प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सतर्कता विभाग को पूरी छूट दी गई है।
निष्कर्ष:
इस ताजा गिरफ्तारी से यह स्पष्ट है कि उत्तराखंड सरकार अब कड़ी निगरानी और त्वरित कार्रवाई की नीति पर काम कर रही है। विजिलेंस की सक्रियता और आम जनता की बढ़ती शिकायतों पर तुरंत एक्शन राज्य प्रशासनिक व्यवस्था में भरोसा बढ़ा रहा है।
