केन्द्र सरकार के चुनावी बांड महा घोटाले की जांच ईडी व सीबीआई से कराई जाएः करन माहरा
देहरादून ,
उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष करन माहरा ने चुनावी बांड योजना को भाजपा सरकार के महा भ्रष्टाचार का नमूना मात्र बताते हुए कहा कि भाजपा की तत्कालीन केन्द्र सरकार द्वारा वर्ष 2017 में जब चुनावी बांड योजना को वित्त विधेयक के रूप में पेश किया गया था, तो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस इसकी अपारदर्शी, अलोकतांत्रिक और हानिकारक प्रकृति की स्पष्ट रूप से निंदा करने वाली पहली पार्टी थी। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार के चुनावी बांड महा घोटाले की जांच ईडी एवं सीबीआई से कराई जाये। उन्होंने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भाजपा की इस कुटिल चाल के खिलाफ संसद के भीतर और बाहर लगातार अपनी लड़ाई लडती रही है। इस अवसर पर करन माहरा ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुसार किसी भी योजना में पारदर्शिता के बिना स्वस्थ एवं स्वतंत्र लोकतंत्र की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार की इस महा भ्रष्टाचार एवं “काला धन रूपांतरण“ योजना को ‘‘असंवैधानिक’’ मानते हुए सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करती है। इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि चुनावी बांड योजना कुछ और नहीं बल्कि भाजपा की केन्द्र सरकार द्वारा अपनी पार्टी का खजाना भरने के लिए बनाई गई एक काला धन को सफेद करो योजना थी। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा लाई गई चुनावी बांड योजना सत्तारूढ़ भाजपा को लाभ पहुंचाने के लिए डिजाईन की गई थी जिसके माध्यम से भारतीय जनता पार्टी ने राजनीतिक दान का 95 प्रतिशत हांसिल किया। उन्होंने कहा कि यह असंवैधानिक योजना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) का स्पष्ट उल्लंघन है तथा इस प्रकार की असंवैधानिक योजना को लोकतंत्र में उचित नहीं ठहराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का राग अलापते हुए बार-बार दावा किया जा रहा है कि काले धन पर अंकुश लगाया जा रहा है जो कि बिल्कुल निराधार है और जिसकी पोल सर्वोच्च न्यायालय के फैसले ने खोल दी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा चुनावी बांड योजना को आर.टी.आई. के प्रावधानों के दायरे से बाहर रख कर काले धन को सफेद करने को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा भी चेतावनी दी गई थी कि चुनावी बांड योजना काले धन को राजनीति में लाने का माध्यम है परन्तु तत्कालीन वित्त मंत्री द्वारा रिजर्व बैंक की आशंका को खारिज कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि यही नहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा चुनावी बांड योजना के विरोध को कम करने के प्रयास में जानबूझ कर चुनाव आयोग को भी गुमराह किया गया।