गुरुवाणी और संस्कृत का दिव्य संगम, राज्यपाल ने किया ‘आदि श्री गुरु ग्रंथ साहिब’ के संस्कृत पद्यानुवाद का विमोचन

देहरादून ,

उत्तराखंड के राज्यपाल गुरमीत सिंह ने शनिवार को लोक भवन में ‘आदि श्री गुरु ग्रंथ साहिब’ के संस्कृत पद्यानुवाद का विमोचन किया। यह श्री गुरु ग्रंथ साहिब का संस्कृत में पहला संपूर्ण पद्यानुवाद है, जिसे रामतीर्थ केंद्र और साहित्याचार्य जयनारायण शास्त्री ने तैयार किया है। कार्यक्रम रामतीर्थ केंद्र, सहारनपुर की स्वर्ण जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया।

राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि यह आयोजन केवल एक संस्थान की स्वर्ण जयंती का उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, अध्यात्म, ज्ञान परंपरा और राष्ट्रीय एकात्मता का ऐतिहासिक पर्व है। उन्होंने कहा कि गुरुवाणी और देववाणी संस्कृत का यह दिव्य संगम भारत की सांस्कृतिक एकता, आध्यात्मिक संवाद और सामाजिक समरसता का सशक्त प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब के गहन संदेशों को समझकर उन्हें जीवन में अपनाना और उसके ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। राज्यपाल के अनुसार, यह संस्कृत पद्यानुवाद भारतीय ज्ञान परंपरा, साहित्य और अध्यात्म के इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए अध्ययन, शोध और प्रेरणा का महत्वपूर्ण आधार बनेगा।

राज्यपाल ने साहित्याचार्य जयनारायण शास्त्री ‘यात्री’ की दशकों की साधना और विद्वत्ता की सराहना करते हुए कहा कि उनके अथक प्रयासों से यह अद्वितीय कृति संभव हो सकी। उन्होंने आचार्य सर्वेश्वर नाथ प्रभाकर, आचार्य गंगेश्वर नाथ प्रभाकर, डॉ. आभा प्रभाकर तथा संपूर्ण संपादकीय मंडल के योगदान की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि दस्तावेजीकरण और प्रकाशन केवल अभिलेखन नहीं, बल्कि सभ्यता की सामूहिक स्मृति के संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम है।

इस अवसर पर संजय करोल, ब्रह्मऋषि अमरदास जी महाराज, गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज, स्वामी कृष्णानंद जी महाराज, आचार्य सर्वेश्वर नाथ प्रभाकर, प्रमुख सचिव न्याय अमित कुमार सिरोही, सचिव संस्कृत शिक्षा दीपक कुमार, उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष बलजीत सोनी, उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाकांत पांडेय, दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल सहित अनेक संत-महात्मा, विद्वान, आचार्य, शोधार्थी और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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