हरिद्वार ,
श्रावण मास की शिवभक्ति के बीच शनिवार को ज्वालापुर स्थित जटवाड़ा पुल पर उस समय भक्तिमय माहौल बन गया, जब उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक भगवा वस्त्र धारण कर कांवड़ियों की सेवा में जुट गए। उन्होंने भंडारे में अपने हाथों से श्रद्धालुओं को भोजन परोसा और बाद में स्वयं कंधे पर कांवड़ उठाकर शिवभक्तों का उत्साह बढ़ाया।
डॉ. निशंक के पहुंचते ही पूरा क्षेत्र “बोल बम” और “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा। उन्होंने बिना किसी औपचारिकता के कतार में बैठे कांवड़ियों को पूड़ी, सब्जी और प्रसाद परोसा तथा उनकी यात्रा का हालचाल भी जाना। भोजन वितरण के बाद उन्होंने श्रद्धालुओं से बातचीत कर मार्ग में सुरक्षा, पेयजल, चिकित्सा और विश्राम स्थलों की व्यवस्थाओं की जानकारी ली। कांवड़ियों ने व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त करते हुए शासन-प्रशासन की सराहना की।
इसके बाद जब डॉ. निशंक ने गंगाजल से भरी कांवड़ अपने कंधे पर उठाई तो वहां मौजूद शिवभक्तों का उत्साह चरम पर पहुंच गया। इस दौरान अनेक श्रद्धालुओं ने उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं और उनका स्वागत किया।
डॉ. निशंक ने कहा कि कांवड़ यात्रा केवल आस्था का पर्व नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और सामाजिक समरसता का महापर्व है। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में आने वाला प्रत्येक शिवभक्त अतिथि के समान है और उसकी सुरक्षित एवं सुगम यात्रा सुनिश्चित करना समाज और प्रशासन सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
इस अवसर पर कांवड़ सेवा दल के पदाधिकारियों संदीप शर्मा, नितिन चौहान और सोम चौहान सहित अन्य सदस्यों ने डॉ. निशंक का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि उनके सेवा भाव ने न केवल कांवड़ियों का मनोबल बढ़ाया, बल्कि समाज को निस्वार्थ सेवा और मानवता का संदेश भी दिया।
जटवाड़ा पुल पर दिनभर भक्तिमय वातावरण बना रहा। शिवभक्तों की लंबी कतारों के बीच सेवा में जुटे डॉ. निशंक का यह दृश्य आकर्षण का केंद्र बना रहा। श्रद्धालुओं का कहना था कि जब जनप्रतिनिधि स्वयं सेवा के लिए आगे आते हैं तो आस्था, विश्वास और जनसहभागिता का उत्साह और अधिक बढ़ जाता है।