अमित शाह की अध्यक्षता में छह राज्यों के बीच MoU, 422 मेगावाट बिजली और 1,562 MCM जलाशय से मिलेगा लाभ
नई दिल्ली/देहरादून ,
करीब आठ दशकों से लंबित किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को धरातल पर उतारने की दिशा में मंगलवार को महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के बीच परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने MoU पर हस्ताक्षर को करीब आठ दशक से प्रतीक्षित किशाऊ परियोजना को साकार करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने भारत सरकार और सभी सहभागी राज्यों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह परियोजना जल सुरक्षा, ऊर्जा उत्पादन, सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और यमुना के पुनर्जीवीकरण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि किशाऊ परियोजना की परिकल्पना वर्ष 1940 में की गई थी। इसके बाद विभिन्न स्तरों पर इसे आगे बढ़ाने के प्रयास हुए, लेकिन कई कारणों से परियोजना लंबे समय तक गति नहीं पकड़ सकी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लंबे समय से लंबित महत्वपूर्ण परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है और किशाऊ परियोजना भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
धामी ने कहा कि 16 जून 2026 को हुई बैठक के बाद परियोजना से जुड़ी कई महत्वपूर्ण अड़चनों के समाधान का मार्ग प्रशस्त हुआ। केंद्र और सहभागी राज्यों के बीच लगातार समन्वय के परिणामस्वरूप अब MoU के माध्यम से परियोजना को औपचारिक रूप से आगे बढ़ाया गया है।
422 मेगावाट बिजली और 1,562 MCM जलाशय
मुख्यमंत्री के अनुसार किशाऊ केवल बांध निर्माण की परियोजना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय महत्व की बहुउद्देशीय परियोजना है। इसके तहत करीब 1,562 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) क्षमता का जलाशय विकसित होगा, जबकि 422 मेगावाट विद्युत उत्पादन की क्षमता विकसित की जाएगी।
परियोजना का लाभ उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान सहित पूरे अपर यमुना बेसिन को मिलने की उम्मीद है। इससे सिंचाई, पेयजल और ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।
पुनर्वास और पर्यावरण संरक्षण पर रहेगा जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना के निर्माण के दौरान प्रभावित परिवारों का उचित, संवेदनशील और सम्मानजनक पुनर्वास राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। विकास के साथ प्रभावित परिवारों के हितों का संरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि परियोजना के लिए करीब 2,500 हेक्टेयर वन भूमि के हस्तांतरण की आवश्यकता होगी। इसके चलते क्षतिपूरक वनीकरण के लिए भी बड़ी मात्रा में भूमि की जरूरत पड़ेगी। उत्तराखंड जैसे वनाच्छादित पर्वतीय राज्य के लिए इतनी बड़ी भूमि उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण है।
धामी ने केंद्र सरकार और सभी सहभागी राज्यों से क्षतिपूरक वनीकरण के लिए आवश्यक भूमि चिन्हित करने में उत्तराखंड को सहयोग देने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है तथा परियोजना से जुड़े सभी पर्यावरणीय एवं वन संबंधी प्रावधानों का नियमानुसार अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में सभी सहभागी राज्य किशाऊ परियोजना को समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतारने के लिए मिलकर कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि यह MoU केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण परियोजना की शुरुआत का ऐतिहासिक पड़ाव है।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सहित केंद्रीय मंत्रियों, सहभागी राज्य सरकारों और वरिष्ठ अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।