उत्तराखंड रजत जयंती पर हरेला पर्व बनेगा ऐतिहासिक, देहरादून में लगाए जाएंगे 15.50 लाख पौधे

देहरादून ,

उत्तराखंड की संस्कृति और प्रकृति संरक्षण का प्रतीक हरेला पर्व इस वर्ष राज्य की रजत जयंती (25वें वर्ष) के अवसर पर खास अंदाज में मनाया जाएगा। आगामी 16 जुलाई से शुरू होने वाला यह लोकपर्व पूरे एक माह तक चलेगा। इस दौरान देहरादून जनपद में थीमैटिक (विषय आधारित) पौधरोपण अभियान चलाकर पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है।

हरेला पर्व की तैयारियों को लेकर मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। जिलाधिकारी ने कहा कि इस वर्ष का अभियान केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि धरती को हराभरा बनाने के लिए इसे व्यापक जन आंदोलन के रूप में संचालित किया जाएगा।

माइक्रो प्लानिंग के साथ चलेगा अभियान

जिलाधिकारी ने सभी सरकारी विभागों को जल्द से जल्द पौधरोपण स्थलों का चयन करने के निर्देश दिए। अभियान को प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए प्रत्येक विभाग में नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे, जो माइक्रो लेवल पर कार्ययोजना तैयार करेंगे।

इस अभियान में आम नागरिकों के साथ जनप्रतिनिधियों, युवाओं, महिला समूहों और स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा आईएमए, सर्वे ऑफ इंडिया, ओएनजीसी और आईटीबीपी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों को भी जोड़ा जाएगा, ताकि क्षेत्र की मिट्टी और जलवायु के अनुसार उच्च गुणवत्ता वाले ‘क्वालिटी फॉरेस्ट’ विकसित किए जा सकें।

हरित कंट्रोल रूम से होगी निगरानी

हरेला अभियान की सफलता और पौधों की देखभाल सुनिश्चित करने के लिए विशेष ‘हरित कंट्रोल रूम’ स्थापित किया जाएगा। इसके माध्यम से पूरे एक माह तक चलने वाले पौधरोपण अभियान की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी।

15.50 लाख पौधरोपण का लक्ष्य, 5 साल तक होगी देखभाल

बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी ने बताया कि इस वर्ष देहरादून जिले में 15.50 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें 50 प्रतिशत पौधे फलदार और चारा प्रजाति के होंगे। पौधरोपण के बाद इनकी सुरक्षा और रखरखाव की जिम्मेदारी अगले पांच वर्षों तक तय की जाएगी।

10 जुलाई तक पूरी होंगी तैयारियां

सभी संबंधित विभागों को 10 जुलाई तक गड्ढों की खुदाई, जैविक खाद, ट्री-गार्ड और पौधों के परिवहन की व्यवस्थाएं पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। वन विभाग के मसूरी, कालसी, चकराता और देहरादून वन प्रभागों के माध्यम से विभागों को पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, प्रभागीय वनाधिकारी नीरज कुमार शर्मा, वैभव सिंह, मयंक कुमार, एसडीओ अभिषेक मैठाणी सहित कृषि, उद्यान, उद्योग, शिक्षा, खेल, पेयजल और सड़क विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

जिलाधिकारी ने कहा कि हरेला पर्व उत्तराखंड की संस्कृति और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक है। इस अभियान के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित और स्वस्थ पर्यावरण तैयार करने का प्रयास किया जाएगा।

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