देहरादून ,
स्तन में होने वाली छोटी सी गांठ को नजरअंदाज करना किस तरह गंभीर समस्या का रूप ले सकता है, इसका एक अनोखा उदाहरण श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में सामने आया है। अस्पताल के ब्रेस्ट सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. नीलकमल कुमार और उनकी टीम ने 35 वर्षीय महिला के स्तन से 12.5 किलोग्राम वजन का फुटबॉल के आकार का विशाल फायलोड्स ट्यूमर सफलतापूर्वक निकालकर उन्हें नया जीवन दिया है।
करीब चार घंटे तक चले इस जटिल ऑपरेशन की खास बात यह रही कि चिकित्सकों ने स्तन की प्राकृतिक संरचना को सुरक्षित रखते हुए ट्यूमर को सफलतापूर्वक बाहर निकाल दिया। ऑपरेशन के बाद महिला पूरी तरह स्वस्थ हैं और उन्हें मात्र तीन दिन बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
वरिष्ठ ब्रेस्ट एवं एंडोक्राइन सर्जन डॉ. नीलकमल कुमार ने बताया कि मेडिकल साइंस में इस बीमारी को “फायलोड्स ट्यूमर” कहा जाता है, जो स्तन का एक अत्यंत दुर्लभ लेकिन तेजी से बढ़ने वाला ट्यूमर होता है। उन्होंने कहा कि केवल ट्यूमर के आकार या प्रारंभिक जांच के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि वह कैंसरयुक्त है या नहीं। इसकी वास्तविक स्थिति का पता बायोप्सी जांच के बाद ही चल पाता है।
डॉ. नीलकमल कुमार के अनुसार, महिला के स्तन में शुरुआत में एक छोटी गांठ थी, जिसके लिए वह स्थानीय स्तर पर उपचार ले रही थीं। भय, संकोच और जागरूकता की कमी के कारण उन्होंने विशेषज्ञ चिकित्सक से समय पर परामर्श नहीं लिया। इस दौरान उन्होंने होम्योपैथिक और आयुर्वेदिक उपचार का भी सहारा लिया, लेकिन कोई विशेष लाभ नहीं मिला। परिणामस्वरूप कुछ ही सप्ताह में गांठ तेजी से बढ़कर फुटबॉल के आकार के विशाल ट्यूमर में बदल गई।
ट्यूमर के अत्यधिक बढ़ जाने से महिला को सांस लेने में कठिनाई, लगातार दर्द, सोने में परेशानी और दैनिक कार्यों को करने में गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। इसके अलावा वह सामाजिक कार्यक्रमों में जाने से बचने लगी थीं और मानसिक तनाव तथा भय की स्थिति में पहुंच गई थीं। उन्हें लगातार इस बात की आशंका सता रही थी कि कहीं यह कैंसर तो नहीं है।
डॉ. नीलकमल कुमार ने बताया कि फायलोड्स ट्यूमर की सबसे बड़ी चुनौती इसकी पुनरावृत्ति यानी दोबारा होने की संभावना होती है। इसलिए ऐसे जटिल मामलों का उपचार ब्रेस्ट विशेषज्ञों की निगरानी में ही कराया जाना चाहिए। समय पर जांच, उचित सर्जरी और नियमित फॉलो-अप के माध्यम से इस जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के सुपर स्पेशियलिटी ब्रेस्ट विभाग में अनुभवी विशेषज्ञों की टीम उपलब्ध है। यही कारण है कि प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों से ऐसे जटिल मरीज, जिनका अन्य अस्पतालों में उपचार हो चुका होता है या जिनमें ट्यूमर दोबारा विकसित हो जाता है, उपचार के लिए यहां पहुंचते हैं।
चिकित्सकों ने महिलाओं से अपील की है कि स्तन में किसी भी प्रकार की गांठ, सूजन या असामान्य बदलाव को नजरअंदाज न करें और बिना संकोच विशेषज्ञ चिकित्सक से समय रहते परामर्श लें, ताकि गंभीर स्थिति से बचा जा सके।