देहरादून ,
सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो के संज्ञान में आने के बाद राज्य सरकार ने मदरसों में बाहरी राज्यों के बच्चों को लाए जाने के मामले को गंभीरता से लिया है। शासन ने पूरे प्रदेश में जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा, पारदर्शिता और नियमों का पालन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की अनियमितता पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
🔍 जिलों में वेरिफिकेशन ड्राइव के निर्देश
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने देहरादून, हरिद्वार, उधमसिंह नगर और नैनीताल के जिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में व्यापक सत्यापन अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इस अभियान के तहत वास्तविक स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपी जाएगी।
👨👩👧👦 बच्चों की सुरक्षा पर फोकस
जांच के दौरान बच्चों के आगमन के स्रोत, अभिभावकों की सहमति और उन्हें लाने वाले व्यक्तियों की भूमिका की गहन पड़ताल की जाएगी। इसके लिए प्रदेश के सभी मदरसों में सघन निरीक्षण और सत्यापन अभियान चलाया जाएगा।
📊 452 पंजीकृत मदरसे संचालित
प्रदेश में वर्तमान में 452 पंजीकृत मदरसे संचालित हैं। शासन ने इन सभी संस्थानों को जांच के दायरे में लाने की तैयारी की है।
📚 नई शिक्षा व्यवस्था लागू
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा वर्ष 2025 में लागू उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम के तहत 1 जुलाई 2026 से मदरसा बोर्ड का अस्तित्व समाप्त कर दिया जाएगा। इसके बाद सभी मदरसों को उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा बोर्ड से संबद्धता लेनी होगी और नई व्यवस्था के तहत उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
सरकार का कहना है कि इस कदम से शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और बच्चों के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।