देहरादून ,
देहरादून में प्रस्तावित रिस्पना–बिंदाल एलिवेटेड रोड परियोजना को लेकर विरोध तेज हो गया है। उत्तराखंड इंसानियत मंच और उत्तराखंड महिला मंच ने संयुक्त रूप से इस प्रोजेक्ट के खिलाफ पदयात्रा की शुरुआत की है। पहले चरण में तीन दिनों तक रिस्पना नदी के किनारे स्थित बस्तियों में पदयात्रा निकाली जाएगी, इसके बाद बिंदाल नदी किनारे की बस्तियों में भी आंदोलन किया जाएगा।
पदयात्रा की शुरुआत राजीवनगर पुल के पास से हुई, जो राजीवनगर, भगत सिंह कॉलोनी और पूरन बस्ती सहित कई इलाकों से गुजरते हुए पहले दिन संजय कॉलोनी, इंदर रोड पुल पर समाप्त हुई। पदयात्री गले में एलिवेटेड रोड के विरोध में लिखी तख्तियां लटकाए नारे लगाते और जनगीत गाते हुए आगे बढ़े। बड़ी संख्या में स्थानीय बस्तीवासी भी पदयात्रा में शामिल हुए। इस दौरान करीब छह स्थानों पर नुक्कड़ सभाएं आयोजित की गईं।
नुक्कड़ सभाओं में बस्तीवासियों ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए कहा कि उन्होंने जीवनभर की कमाई अपने घर बनाने में लगा दी है और अब सरकार उन्हें बेघर करने की तैयारी कर रही है। लोगों का कहना था कि यदि सरकार एलिवेटेड रोड बनाना चाहती है तो पहले प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था की जाए। कुछ लोगों ने साफ कहा कि वे किसी भी स्थिति में अपने घर नहीं छोड़ेंगे।
उत्तराखंड इंसानियत मंच और उत्तराखंड महिला मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि सभी लोग मिलकर संघर्ष करें तो बस्तियों को उजड़ने से बचाया जा सकता है। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार ने इन बस्तियों में बिजली, पानी और सीवर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराईं और हाउस टैक्स भी वसूला जा रहा है, लेकिन अब इन्हें अवैध बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बस्तीवासियों के खिलाफ आम लोगों में नफरत फैलाना संविधान और देश की परंपराओं के खिलाफ है।
गौरतलब है कि इससे पहले सामाजिक संगठनों ने केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर रिस्पना–बिंदाल एलिवेटेड रोड परियोजना को शुरू न करने की मांग की थी।
उल्लेखनीय है कि देहरादून को जाम से मुक्त करने और मसूरी मार्ग को सुगम बनाने के उद्देश्य से रिस्पना और बिंदाल नदियों के ऊपर लगभग 26 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर की योजना बनाई गई है। हालांकि, इसके संभावित पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों को लेकर लगातार विरोध सामने आ रहा है।