देहरादून ,
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दूरदर्शी दिशा-निर्देशों और चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के सतत मार्गदर्शन में उत्तराखंड का चिकित्सा शिक्षा विभाग तेज़ी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। राज्य सरकार का स्पष्ट लक्ष्य प्रत्येक नागरिक को सुलभ, गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराना तथा युवाओं को उच्चस्तरीय चिकित्सा शिक्षा के अवसर प्रदान करना है। इस लक्ष्य को साकार करने में चिकित्सा शिक्षा सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार की प्रभावी प्रशासनिक भूमिका निर्णायक साबित हो रही है।
वर्ष 2025 चिकित्सा शिक्षा विभाग के लिए उपलब्धियों का वर्ष रहा है। मानव संसाधन की कमी को दूर करने, मेडिकल व नर्सिंग कॉलेजों को सशक्त बनाने, सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं का विस्तार करने और आधुनिक चिकित्सा तकनीकों को अपनाने की दिशा में विभाग ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है।
मानव संसाधन सशक्तिकरण पर विशेष जोर
राज्य सरकार ने वर्ष 2025 में मेडिकल कॉलेजों में नियुक्तियों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। इस दौरान 7 राजकीय मेडिकल कॉलेजों में स्थायी प्राचार्यों की नियुक्ति की गई, जिससे लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक अस्थिरता समाप्त हुई। इसके साथ ही 18 प्रोफेसर, 36 एसोसिएट प्रोफेसर और 142 असिस्टेंट प्रोफेसर का चयन पूरा किया गया है।
नर्सिंग सेवाओं को मजबूत करने के लिए 1248 नर्सिंग अधिकारियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए, जबकि सीएसएसडी/ओटी टेक्नीशियन और फार्मासिस्ट के पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया जारी है।
नर्सिंग शिक्षा और पीजी सीटों में विस्तार
राजकीय नर्सिंग कॉलेजों में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और नर्सिंग ट्यूटर की नियुक्ति के साथ-साथ नए पदों का सृजन किया गया। चमोली, पौड़ी, अल्मोड़ा और हल्द्वानी नर्सिंग कॉलेजों में एमएससी नर्सिंग पाठ्यक्रम की शुरुआत की गई है।
राज्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए वर्ष 2025 में कुल 68 पीजी सीटों की वृद्धि की गई है।
अधोसंरचना और सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं का विस्तार
दून मेडिकल कॉलेज में 750 सीट और हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में 1000 सीट क्षमता वाले आधुनिक ऑडिटोरियम का लोकार्पण किया गया। दून चिकित्सालय में 4 नए इमरजेंसी ऑपरेशन थिएटर शुरू किए गए।
देहरादून और हल्द्वानी मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशियलिटी विभाग स्थापित किए गए हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों को आकर्षित करने के लिए वेतनमान में ऐतिहासिक वृद्धि की गई है।
अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएँ
हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में आई बैंक और कॉर्निया प्रत्यारोपण केंद्र की शुरुआत की गई है, वहीं दून चिकित्सालय में हाइपरबारिक ऑक्सीजन थेरेपी की सुविधा शुरू हुई है।
राज्य के पहले कैंसर संस्थान, हल्द्वानी का निर्माण 41 प्रतिशत पूरा हो चुका है, जबकि रुद्रपुर और पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेजों का निर्माण तेजी से जारी है।
2030 तक हर 1000 आबादी पर एक डॉक्टर का लक्ष्य
वर्ष 2026 के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग ने कई महत्वाकांक्षी योजनाएँ तैयार की हैं। राज्य में कुल 7 मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की जा रही है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक प्रत्येक 1000 की आबादी पर एक डॉक्टर उपलब्ध कराना है।
चिकित्सा शिक्षा सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि विभाग का उद्देश्य केवल भवन निर्माण नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूत व्यवस्था तैयार करना है। उन्होंने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के नेतृत्व में उत्तराखंड आने वाले वर्षों में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान बनाएगा।

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