SIR के विरोध में देहरादून में नागरिक मार्च, सचिवालय के पास आंदोलनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया – uttarakhandawaaz.in

SIR के विरोध में देहरादून में नागरिक मार्च, सचिवालय के पास आंदोलनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया

मतदाता सूची से हटाए गए नामों की बहाली और SI प्रक्रिया रद्द करने की मांग, मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपने जा रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने रो

देहरादून ,

उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और प्री-SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के विरोध में सोमवार को देहरादून में विभिन्न सामाजिक, महिला, छात्र एवं जन संगठनों ने नागरिक मार्च निकाला। प्रदर्शनकारी मतदाता सूची से हटाए गए नामों की बहाली, वर्ष 2026 की SIR प्रक्रिया रद्द करने और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा की मांग कर रहे थे। सचिवालय स्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर बढ़ रहे मार्च को पुलिस ने रोक दिया और कई आंदोलनकारियों को हिरासत में ले लिया।

गांधी पार्क से शुरू हुआ मार्च, सचिवालय के पास पुलिस ने रोका

उत्तराखंड इंसानियत मंच और उत्तराखंड महिला मंच के नेतृत्व में निकाला गया नागरिक मार्च गांधी पार्क से शुरू हुआ। इसमें अग्रगामी छात्र नौजवान सभा, स्त्री मुक्ति लीग संगठन, BGVS, जनवादी महिला संगठन, जन संवाद, AIDSO, SFI, महिला एकता केंद्र, इप्टा सहित विभिन्न जन संगठनों के प्रतिनिधियों और नागरिकों ने भाग लिया। विभिन्न चुनावी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी प्रदर्शन में शामिल हुए।

मार्च जब सचिवालय के निकट पहुंचा तो वहां तैनात भारी पुलिस बल ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया। आयोजकों के अनुसार, इस दौरान पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच धक्का-मुक्की एवं हाथापाई हुई। पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को बसों तक पहुंचाया और उन्हें हिरासत में ले लिया। इसके चलते आंदोलनकारी मुख्य निर्वाचन अधिकारी को अपना ज्ञापन नहीं सौंप सके।

हिरासत में लिए गए प्रमुख लोगों में कमला पंत, निर्मला बिष्ट और डॉ. रवि चोपड़ा शामिल थे।

मतदाता सूची से 17.05 लाख नाम हटाए जाने पर उठाए सवाल

प्रदर्शनकारी संगठनों ने दावा किया कि उत्तराखंड में प्री-SIR और SIR प्रक्रिया के दौरान लगभग 17.05 लाख नाम हटाए गए, जबकि करीब 4.01 लाख नाम जोड़े गए। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव की मतदाता सूची की तुलना में नामों की संख्या में आई इस कमी पर उन्होंने गंभीर चिंता जताई।

संगठनों का कहना था कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र की बुनियाद है और मतदाता सूची में नाम दर्ज होना इस अधिकार के इस्तेमाल की पहली शर्त है। उनके अनुसार, मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य सूची को सटीक एवं पारदर्शी बनाना होना चाहिए, न कि पात्र नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित करना।

प्रदर्शनकारियों ने यह भी सवाल उठाया कि नाम हटाने से पहले संबंधित मतदाताओं से संपर्क करने, उनकी पात्रता का सत्यापन करने और उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर देने के लिए क्या कदम उठाए गए।

SIR प्रक्रिया रद्द करने और हटाए गए नाम बहाल करने की मांग

आंदोलनकारियों ने वर्ष 2026 की SIR प्रक्रिया रद्द करने और वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में इस्तेमाल की गई मतदाता सूची को आधार बनाकर नागरिकों के मताधिकार की रक्षा करने की मांग की।

वक्ताओं ने कहा कि केवल मतदाता के अनुपस्थित होने, स्थान परिवर्तन की आशंका या सत्यापन में कठिनाई के आधार पर निर्धारित प्रक्रिया और उचित जांच के बिना नाम नहीं हटाए जाने चाहिए। उन्होंने गलत तरीके से हटाए गए नामों की बहाली और पूरी प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी तथा जवाबदेह बनाने पर जोर दिया।

स्वतंत्र जांच और बूथ स्तर पर शिकायत निवारण शिविर की मांग

प्रस्तावित ज्ञापन में संगठनों ने प्री-SIR के दौरान हटाए गए नामों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की। इसके अलावा, नाम हटाने से पहले संबंधित मतदाताओं को सूचना देने, सुनवाई का अवसर प्रदान करने और सभी जिलों एवं विधानसभा क्षेत्रों में बूथ स्तर पर शिकायत निवारण शिविर आयोजित करने की मांग भी रखी गई थी।

प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची का स्वतंत्र ऑडिट कराने, शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने और नागरिकों को अनावश्यक कार्यालयी प्रक्रियाओं से राहत देने की आवश्यकता बताई।

ज्ञापन सौंपे बिना लौटे आंदोलनकारी

मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपने के उद्देश्य से निकाले गए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों को कार्यालय तक पहुंचने का अवसर नहीं मिला। पुलिस कार्रवाई के बाद आंदोलनकारियों ने मताधिकार की रक्षा, हटाए गए नामों की बहाली और SIR प्रक्रिया को लेकर अपनी मांगें दोहराईं।

प्रदर्शन में शामिल संगठनों ने निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग उठाते हुए कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने से संबंधित शिकायतों के निस्तारण के लिए प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए।

नोट: मतदाता सूची से हटाए गए और जोड़े गए नामों के आंकड़े प्रदर्शनकारी संगठनों के दावों पर आधारित हैं। इन आंकड़ों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि इस समाचार में उपलब्ध नहीं है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *