श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में माइक्रोसर्जरी से मरीज का पैर बचाया, सफल उपचार बना मिसाल – uttarakhandawaaz.in

श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में माइक्रोसर्जरी से मरीज का पैर बचाया, सफल उपचार बना मिसाल

देहरादून ,

श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में प्लास्टिक एवं रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी विभाग की टीम ने एक मरीज का माइक्रोवैस्क्युलर फ्री-फ्लैप सर्जरी द्वारा सफल उपचार कर उसका पैर बचा लिया।
ज्वालापुर (हरिद्वार) निवासी मोहम्मद अफजल को अगस्त माह में अस्पताल में भर्ती किया गया था। डायबिटीज के कारण उनके दाएँ पैर की त्वचा पूरी तरह नष्ट हो चुकी थी और अंदर की हड्डी गलने लगी थी। पैर काटने की नौबत से बचाने के लिए उन्हें प्रो. डॉ. भावना प्रभाकर के निर्देशन में प्लास्टिक सर्जरी विभाग में भर्ती किया गया।


🔹 सटीक माइक्रोसर्जरी से मिला नया जीवन

शुरुआत में घाव की सफाई हेतु डिब्राइडमेंट सर्जरी की गई, इसके बाद माइक्रोवैस्क्युलर फ्री-फ्लैप सर्जरी की गई।
इस तकनीक में माइक्रोस्कोप की सहायता से बेहद पतली नसों को जोड़कर, शरीर के स्वस्थ हिस्से से लिया गया ऊतक (टिश्यू) प्रभावित स्थान पर प्रत्यारोपित किया जाता है।
यदि इस स्थिति में केवल स्किन ग्राफ्ट लगाया जाता, तो मरीज को चलने में कठिनाई और घाव के दोबारा बढ़ने की संभावना रहती। लेकिन इस सटीक माइक्रोसर्जरी ने मरीज का पैर बचाकर उसे नया जीवन दे दिया।


🔹 “माइक्रोसर्जरी—अत्याधुनिक और जीवनरक्षक तकनीक”

प्रो. डॉ. भावना प्रभाकर ने बताया कि

“माइक्रोसर्जरी, प्लास्टिक एवं रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी की सबसे उन्नत विधियों में से एक है। इसमें 1 मिमी से भी पतली रक्त वाहिकाओं (arteries एवं veins) और नसों को जोड़ा जाता है।”

उन्होंने बताया कि यह तकनीक —

  • गंभीर चोटों,

  • जलने,

  • कैंसर सर्जरी के बाद हुए ऊतक नुकसान,

  • और अंग पुनर्निर्माण जैसी स्थितियों में अत्यंत उपयोगी है।


🔹 श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल—आधुनिक तकनीकों से सुसज्जित

डॉ. प्रभाकर ने बताया कि अस्पताल में माइक्रोवैस्क्युलर सर्जरी से जुड़ी सभी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।
इस तकनीक की सहायता से न केवल अंगों को संरक्षित किया जा सकता है, बल्कि मरीजों को उनके सामान्य जीवन में शीघ्र लौटने में भी मदद मिलती है।


🩺 यह सफलता उत्तराखंड में अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की बढ़ती क्षमता और चिकित्सा विशेषज्ञों की दक्षता का प्रमाण है

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