रिपोर्ट विशेष – देहरादून सिटीजन फोरम ने उठाए रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना पर गंभीर सवाल – uttarakhandawaaz.in

रिपोर्ट विशेष – देहरादून सिटीजन फोरम ने उठाए रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना पर गंभीर सवाल

 ₹6200 करोड़ की परियोजना पर पारदर्शिता और जन भागीदारी की कमी को लेकर चिंता

देहरादून ,

देहरादून के नागरिकों के जागरूक समूह “देहरादून सिटीजन फोरम” ने रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना पर गंभीर आपत्तियां और सवाल उठाए हैं। हाल ही में आयोजित बैठक में फोरम के सदस्यों ने सर्वसम्मति से इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि ₹6200 करोड़ की इस मेगाप्रोजेक्ट की योजना में जनभागीदारी और पारदर्शिता का पूर्ण अभाव है।


🔍 बैठक के प्रमुख मुद्दे और चिंताएं:

📄 1. परियोजना की प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव:

  • विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) और पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) सार्वजनिक नहीं हैं।

  • सरकार ने अब तक कोई नागरिक-संवाद या जनसुनवाई आयोजित नहीं की।

  • निर्णय प्रक्रिया एकतरफा और समुदाय से कटी हुई प्रतीत हो रही है।

🏞️ 2. पर्यावरणीय और पारिस्थितिकीय खतरे:

  • परियोजना रिस्पना और बिंदाल नदियों के ऊपर प्रस्तावित है – दोनों ही पहले से प्रदूषण और अतिक्रमण से जूझ रही हैं।

  • निर्माण कार्य से नदी तल का पक्कीकरण, जल प्रवाह में बाधा, और जैव विविधता को क्षति की आशंका।

🧭 3. दीर्घकालिक सोच की कमी:

  • निर्णय वर्तमान यातायात के हल पर केंद्रित है, लेकिन जलवायु परिवर्तन और भविष्य की जनसंख्या प्रवृत्तियों को नजरअंदाज किया गया।

  • फोरम ने कहा कि “100 वर्षों की दृष्टि से शहरी समाधान तैयार किए जाने चाहिए, न कि केवल पर्यटन-केंद्रित सोच से।”

🚧 4. अन्य प्रोजेक्ट्स से सीख न लेना:

  • सहस्त्रधारा रोड जैसी सड़क चौड़ीकरण परियोजनाओं के प्रभावों का अब तक कोई ठोस मूल्यांकन नहीं।

  • हाल के प्रोजेक्ट्स के नतीजे बताने में प्रशासन की चुप्पी चिंता का विषय।

🚫 5. विरोधाभासपूर्ण नीतियां:

  • एक ओर पर्यटकों के पंजीकरण द्वारा संख्या नियंत्रण की बात, दूसरी ओर एलिवेटेड कॉरिडोर, रोपवे और वैकल्पिक मार्गों का निर्माण।

  • फोरम ने इसे विकास रणनीति में असंगति और दृष्टिकोण की कमी करार दिया।


🗣️ फोरम की मांगें:

  • परियोजना पर तत्काल पुनर्विचार।

  • DPR और EIA को सार्वजनिक किया जाए।

  • शहरभर में जन संवाद, बैठकें और वैकल्पिक समाधान प्रस्तुत किए जाएं।

  • निर्णय प्रक्रिया में स्थानीय समुदाय, विशेषज्ञों और स्वतंत्र एजेंसियों को शामिल किया जाए।


👥 उपस्थित प्रमुख सदस्य:

फोरम की बैठक में विभिन्न पृष्ठभूमियों से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता, पूर्व अधिकारी, शिक्षाविद् और सैन्य अधिकारी शामिल रहे।
फ्लोरेंस पांधी, परमजीत कक्कड़, अनूप नौटियाल, रितु चटर्जी, हिमांशु अवस्थी, मौसमी भट्टाचार्य, कैप्टन वाई. भट्टाचार्य, लेफ्टिनेंट कर्नल सनी बख्शी, सुनील नेहरू, रमन्ना कुमार, पूर्णिमा वर्मा, ध्रुव बत्रा समेत 25 से अधिक प्रमुख नागरिकों ने भाग लिया।


🧩 अगला कदम:

फोरम ने निर्णय लिया है कि:

  • छोटे अध्ययन समूह बनाए जाएंगे जो परियोजना के हर पहलू का विश्लेषण करेंगे।

  • जन जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे ताकि आम नागरिकों को जानकारी और जुड़ाव मिल सके।

  • इन जानकारियों को प्रशासन और मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक मंचों पर रखा जाएगा।


📢 फोरम का संदेश:

“शहर के भविष्य का निर्णय नागरिकों की सहभागिता से ही हो सकता है। ऐसी विशाल परियोजनाएं बिना सार्वजनिक संवाद और सामाजिक मूल्यांकन के नहीं चलाई जानी चाहिए।”

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