देहरादून ,
हरिद्वार नगर निगम में करोड़ों रुपये के भूमि घोटाले को लेकर उत्तराखंड की धामी सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए नौकरशाही पर बड़ी कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर इस प्रकरण में दो आईएएस, एक पीसीएस अधिकारी सहित कुल दस अधिकारियों को निलंबित किया गया है, जबकि दो अधिकारियों का सेवा विस्तार समाप्त कर दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
हरिद्वार नगर निगम ने द्यारा ग्राम सराय क्षेत्र में कूड़े के ढेर के पास स्थित 2.3070 हैक्टेयर अनुपयुक्त भूमि को करोड़ों रुपये में खरीदा। इस पर सवाल उठने के बाद मुख्यमंत्री धामी ने मामले की जांच के निर्देश दिए। सचिव रणवीर सिंह चौहान द्वारा की गई प्रारंभिक जांच रिपोर्ट 29 मई को शासन को सौंपी गई, जिसके आधार पर यह कार्रवाई हुई।
मुख्य सचिवों पर कार्रवाई
धामी सरकार ने मंगलवार को तत्कालीन नगर निगम प्रशासक और मौजूदा डीएम कर्मेंद्र सिंह, तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी, और हरिद्वार के तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह सहित सात अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी किया।
अब तक की गई कार्रवाई का ब्योरा
हालिया निलंबन
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कर्मेंद्र सिंह – जिलाधिकारी व पूर्व प्रशासक, नगर निगम हरिद्वार
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वरुण चौधरी – पूर्व नगर आयुक्त
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अजयवीर सिंह – पूर्व एसडीएम
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निकिता बिष्ट – वरिष्ठ वित्त अधिकारी
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विक्की – वरिष्ठ वैयक्तिक सहायक
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राजेश कुमार – रजिस्ट्रार कानूनगो
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कमलदास – मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, तहसील हरिद्वार
पूर्व में हुई कार्रवाई
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रविंद्र कुमार दयाल – सहायक नगर आयुक्त (सेवा समाप्त)
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आनंद सिंह मिश्रवाण – प्रभारी अधिशासी अभियंता (निलंबित)
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लक्ष्मी कांत भट्ट – कर एवं राजस्व अधीक्षक (निलंबित)
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दिनेश चंद्र कांडपाल – अवर अभियंता (निलंबित)
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वेदपाल – सम्पत्ति लिपिक (सेवा विस्तार समाप्त)
मुख्यमंत्री धामी का सख्त संदेश
“हमारी सरकार ने पहले दिन से ही स्पष्ट किया है कि लोकसेवा में पद नहीं, बल्कि कर्तव्य और जवाबदेही महत्वपूर्ण हैं। चाहे व्यक्ति कितना भी वरिष्ठ क्यों न हो, अगर वह जनहित और नियमों की अवहेलना करेगा, तो कार्रवाई निश्चित है। हम उत्तराखंड में भ्रष्टाचार मुक्त नई कार्य संस्कृति विकसित करना चाहते हैं। सभी लोक सेवकों को इसके मानकों पर खरा उतरना होगा।”
— पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री