प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की भी मांग की
देहरादून ,
उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष करन माहरा ने राज्यपाल उत्तराखण्ड से हल्द्वानी के बनभूलपुरा स्थित मलिक के बगीचे में घटित घटना की जांच उच्च न्यायालय के सिटिंग जज से कराये जाने तथा राज्य सरकार के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी को मंत्रिमंडल से बर्खास्त किये जाने मांग की है। यहां जानकारी देते हुए प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष संगठन एवं प्रशासन मथुरादत्त जोशी ने बताया कि राज्यपाल को लिखे पत्र में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि आठ फरवरी, 2024 को जनपद नैनीताल में हल्द्वानी के बनभूलपुरा स्थित मलिक के बगीचे में घटित घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है जिसकी कांग्रेस पार्टी कठोर शब्दों में भर्त्सना करती है। इस अवसर पर करन माहरा ने राज्यपाल को यह भी अवगत कराते हुए कहा कि हल्द्वानी में घटित उपरोक्त घटना के उपरान्त प्रदेश सरकार के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी द्वारा एक इलेक्ट्रोनिक मीडिया चैनल पर आठ फरवरी, 2024 को सायं 7ः30 बजे कांग्रेसजनों पर इस घटना का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाकर मामले को साम्प्रदायिक रंग देने की कोशिश की गई जोकि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण एवं दुःखद है। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी द्वारा लगाया गया आरोप कांग्रेस पार्टी की नीतियों एवं सिद्धांतों के खिलाफ है तथा इससे कांग्रेस पार्टी की धर्मनिरपेक्ष छवि को भी धूमिल करने का प्रयास किया गया है। उन्होंने बताया कि कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के बयान से न केवल कांग्रेस पार्टी के 138 सालाना इतिहास को आघात लगा है अपितु कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भावनाओं को भी भारी ठेस पहुंची है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इस प्रकार की अनर्गल बयानबाजी से प्रदेश सरकार के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने न केवल मंत्री पद की गरिमा को गिराया है अपितु उनके द्वारा कांग्रेसजनों के खिलाफ इलेक्ट्रोनिक मीडिया मे ंदिये गये आपत्तिजनक एवं विवादित बयानों से उत्तराखण्ड जैसे शांत प्रदेश का साम्प्रदायिक माहौल बिगाड़ने की भी चेष्टा की गई है। उन्होंने कहा कि कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी द्वारा बदनीयती से जानबूझ कर कांग्रेस नेताओं एवं कांग्रेस पार्टी को बदनाम करने की नीयत से अनर्गल बयानबाजी की गई जो कि एक आपराधिक कृत्य है जिसके उपरान्त वे मंत्री पद पर बने रहने का अधिकार खो चुके हैं। करन माहरा ने राज्यपाल को यह भी अवगत कराया कि स्वयं उनके द्वारा घटना स्थल का दौरा करने पर वहां के स्थानीय लोगों से बातचीत में स्पष्ट रूप से सरकार और स्थानीय प्रशासन की विफलता सामने आई है। उन्होंने बताया कि तोड़-फोड की कार्रवाई से पूर्व स्थानीय प्रशासन द्वारा कोई सर्वे नहीं कराया गया और न ही लोकल इंटेलीजेंस द्वारा सरकार को घटना स्थल की सही स्थिति की जानकारी दी गई। हल्द्वानी की घटना में हिन्दू-मुस्लिम जैसी कोई बात नहीं थी यह घटना केवल एक सम्प्रदाय विशेष के धार्मिक स्थल को तोड़े जाने की प्रशासन की कार्रवाई का विरोध था जो केवल सरकार और प्रशासन की विफलता है तथा जिसे भाजपा सरकार के मंत्री द्वरा साम्प्रदायिक रंग देने की कोशिश की जा रहे हैं।
