देहरादून में ध्वनि प्रदूषण पर मानवाधिकार आयोग सख्त, सिटी मजिस्ट्रेट को दोबारा नोटिस – uttarakhandawaaz.in

देहरादून में ध्वनि प्रदूषण पर मानवाधिकार आयोग सख्त, सिटी मजिस्ट्रेट को दोबारा नोटिस

18 नवंबर को होगी अगली सुनवाई, कार्रवाई और आख्या प्रस्तुत नहीं होने पर आयोग पारित करेगा उचित आदेश

देहरादून ,

शहर की गलियों और कॉलोनियों में फेरीवालों एवं ठेली संचालकों द्वारा लाउडस्पीकर के कथित अनियंत्रित इस्तेमाल से होने वाले ध्वनि प्रदूषण का मामला उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया है। मामले में आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए नगर मजिस्ट्रेट, देहरादून को दोबारा नोटिस जारी किया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि उसके पूर्व आदेश के अनुरूप कार्रवाई नहीं किए जाने पर विचारोपरांत उचित आदेश पारित किए जाएंगे।

यह मामला सामाजिक, आरटीआई एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता भूपेन्द्र कुमार लक्ष्मी की ओर से 13 अप्रैल 2026 को आयोग के समक्ष प्रस्तुत जनहित शिकायत से जुड़ा है। शिकायत में देहरादून के विभिन्न मोहल्लों और कॉलोनियों में सब्जी, फल, कपड़े, बर्तन तथा खाद्य सामग्री बेचने वाले कुछ फेरीवालों एवं ठेली संचालकों द्वारा तेज आवाज में लाउडस्पीकर बजाए जाने की समस्या उठाई गई थी।

23 अप्रैल को आयोग ने दिया था आदेश

शिकायत पर संज्ञान लेते हुए उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग ने 23 अप्रैल 2026 को आदेश पारित किया था। इसमें शिकायत की प्रति नगर मजिस्ट्रेट, देहरादून को भेजने और निर्धारित समय के भीतर मामले में आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। आदेश के अनुसार, पत्रावली को 6 अगस्त 2026 को आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया जाना था।

आख्या प्रस्तुत नहीं होने पर दोबारा नोटिस

आयोग के 6 अगस्त 2026 के आदेश में उल्लेख किया गया कि नगर मजिस्ट्रेट, देहरादून की ओर से आवश्यक आख्या प्रस्तुत नहीं की गई है। इसके बाद आयोग ने दोबारा नोटिस जारी कर निर्धारित तिथि तक आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 नवंबर 2026 की तारीख निर्धारित की गई है।

आयोग की टिप्पणी ने बढ़ाई मामले की गंभीरता

नगर मजिस्ट्रेट को जारी नोटिस में आयोग ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उसके पूर्व आदेश के अनुरूप कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में विचारोपरांत उचित आदेश पारित किए जाएंगे। आयोग की इस टिप्पणी से मामले में प्रशासनिक कार्रवाई और जवाबदेही का महत्व बढ़ गया है।

बुजुर्गों, मरीजों और विद्यार्थियों की परेशानी का मुद्दा

शिकायत में कहा गया है कि फेरीवालों और ठेली संचालकों द्वारा तेज आवाज में लगातार लाउडस्पीकर बजाने से आम नागरिकों को परेशानी होती है। विशेष रूप से बीमार और बुजुर्ग लोगों के आराम में बाधा आती है। विद्यार्थियों की पढ़ाई और एकाग्रता प्रभावित होती है, जबकि रात्रि पाली में काम करने वाले लोगों को दिन में आराम करने में कठिनाई होती है।

शिकायतकर्ता ने ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 के प्रावधानों के अनुरूप प्रभावी कार्रवाई किए जाने की मांग की है, ताकि नागरिकों को अनावश्यक शोर से राहत मिल सके।

अब 18 नवंबर की सुनवाई पर टिकी निगाहें

यह मामला केवल लाउडस्पीकर की तेज आवाज तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर में ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण, नागरिकों के शांतिपूर्ण जीवन और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही से भी जुड़ा है। अब देखना होगा कि अगली सुनवाई से पहले प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं और आयोग के समक्ष आवश्यक आख्या प्रस्तुत की जाती है या नहीं।

जनहित का सवाल: क्या देहरादून में अनियंत्रित ध्वनि प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ठोस कार्रवाई होगी? 18 नवंबर को होने वाली सुनवाई में इस मामले की आगे की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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