देहरादून में ‘युवा जोश’ कार्यशाला: युवाओं को सिखाए मानसिक स्वास्थ्य और सकारात्मक जीवन के गुर – uttarakhandawaaz.in

देहरादून में ‘युवा जोश’ कार्यशाला: युवाओं को सिखाए मानसिक स्वास्थ्य और सकारात्मक जीवन के गुर

एम्स ऋषिकेश के विशेषज्ञों ने तनाव, अवसाद और सोशल मीडिया के प्रभावों पर किया जागरूक, समय पर परामर्श और अपनों से संवाद को बताया अहम

देहरादून,

युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और आत्महत्या की रोकथाम के उद्देश्य से जिला स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण समिति, देहरादून की ओर से राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत ‘सुसाइड प्रिवेंशन थ्रू युवा जोश (YUWA JOSH)’ विषय पर विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), ऋषिकेश के सोशल आउटरीच सेल ने तकनीकी एवं विशेषज्ञ सहयोग प्रदान किया।

कार्यशाला का आयोजन दो चरणों में किया गया। पहला सत्र साईं कॉलेज में और दूसरा राजकीय दून मेडिकल कॉलेज, देहरादून में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज कुमार शर्मा रहे। मुख्य वक्ता के रूप में एम्स ऋषिकेश के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के एडिशनल प्रोफेसर एवं युवा कल्याण विशेषज्ञ डॉ. संतोष कुमार ने प्रतिभागियों को संबोधित किया।

समय पर पहचान और परामर्श से रोकी जा सकती हैं आत्महत्या की घटनाएं

कार्यशाला को संबोधित करते हुए सीएमओ डॉ. मनोज कुमार शर्मा ने युवाओं में बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आत्महत्या एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है, जिसे समय पर लक्षणों की पहचान, जागरूकता और उचित परामर्श के माध्यम से रोकने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति पूरी तरह परिपूर्ण नहीं होता। इसलिए युवाओं को अपनी क्षमताओं को पहचानते हुए आगे बढ़ना चाहिए। तनाव या परेशानी की स्थिति में अपनी भावनाओं को मित्रों और परिवार के साथ साझा करना महत्वपूर्ण है।

डॉ. शर्मा ने विद्यार्थियों से पढ़ाई को बोझ न समझने, बुजुर्गों के साथ समय बिताने और उनके अनुभवों से सीखने की अपील की। उन्होंने डिजिटल दुनिया पर अत्यधिक निर्भरता कम करने, आउटडोर खेलों में भाग लेने और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहने पर भी जोर दिया।

अवसाद और तनाव के कारणों पर विशेषज्ञों ने दी जानकारी

एम्स ऋषिकेश के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. संतोष कुमार ने किशोरों और युवाओं में अवसाद तथा तनाव के प्रमुख कारणों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रभावी रणनीतियों और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का होना बेहद जरूरी है।

एम्स ऋषिकेश की नैदानिक मनोवैज्ञानिक डॉ. ब्रूजिली अब्राहम ने सोशल मीडिया और साथियों के दबाव यानी पीयर प्रेशर के युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को समझाया। उन्होंने बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दूसरों से लगातार तुलना करना, दूसरों की स्वीकृति पाने की चाह और अवास्तविक अपेक्षाएं युवाओं के तनाव को बढ़ा सकती हैं।

विशेषज्ञों ने मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए भावनात्मक संतुलन, मानसिक लचीलापन, स्वस्थ जीवनशैली और तनाव प्रबंधन तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यशाला का प्रमुख संदेश युवाओं को अपनी भावनाओं को समझने, कठिन परिस्थितियों का सामना करने और जरूरत पड़ने पर मदद लेने के लिए प्रोत्साहित करना रहा।

स्वास्थ्य, शिक्षा और पुलिस विभाग के प्रतिनिधियों ने की सहभागिता

साईं कॉलेज में आयोजित सत्र में एम्स ऋषिकेश के विशेषज्ञों के साथ एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के इंस्पेक्टर इंचार्ज मुकेश त्यागी और सब इंस्पेक्टर प्रेरणा चौधरी मौजूद रहे। साईं इंस्टीट्यूट के चीफ एकेडमिक ऑफिसर एसएस गुसाईं तथा पब्लिक हेल्थ विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. आरती रौथान ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।

वहीं, राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में आयोजित दूसरे सत्र में कॉलेज की प्रधानाचार्य डॉ. गीता जैन, एचओडी डॉ. अनुपमा आर्य, एमएंडईओ शुभांश भट्ट, आईईसी समन्वयक पूजन नेगी और एनसीडी अनुभाग से प्रवीण खत्री प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

कार्यशाला के माध्यम से युवाओं को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर खुलकर बात करने, तनाव के शुरुआती संकेतों को पहचानने और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञों की सहायता लेने के लिए प्रेरित किया गया। आयोजकों का उद्देश्य युवाओं के बीच मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सकारात्मक सोच विकसित करना और आत्महत्या की रोकथाम के लिए जागरूकता को बढ़ावा देना रहा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *