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उत्तराखंड में अग्नि सुरक्षा के लिए आएगा नया कानून, नियम तोड़ने वाले भवन होंगे सील

भराड़ीसैंण विधानसभा में अग्निशमन एवं आपात सेवा विधेयक-2026 पेश, फायर एनओसी अनिवार्य करने और उल्लंघन पर जुर्माने का प्रावधान

गैरसैंण (चमोली) ,

उत्तराखंड में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार नया कानून लाने की तैयारी में है। भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में आयोजित सत्र के पहले दिन उत्तराखंड अग्निशमन एवं आपात सेवा विधेयक, 2026 सदन में पेश किया गया। प्रस्तावित विधेयक में अग्नि सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले भवनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, परिसर खाली कराने और उन्हें सील करने जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं।

2016 के अधिनियम की जगह लेगा नया विधेयक

प्रस्तावित विधेयक वर्तमान उत्तराखंड अग्निशमन एवं आपात सेवा, अग्नि निवारण और अग्नि सुरक्षा अधिनियम, 2016 की जगह लेगा। इसका मुख्य उद्देश्य भवनों में आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम सुनिश्चित करना और अग्नि सुरक्षा नियमों का प्रभावी अनुपालन कराना है।

विधेयक के तहत निर्धारित श्रेणियों के भवनों के लिए अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र यानी फायर एनओसी अनिवार्य करने का प्रावधान है। इसमें ऊंची आवासीय इमारतों, होटल, होम स्टे, रिसॉर्ट, स्कूल-कॉलेज, अस्पताल, नर्सिंग होम, कार्यालयों, मॉल और बड़े गोदामों को शामिल किया गया है। फायर एनओसी की अनिवार्यता भवन की ऊंचाई और क्षेत्रफल के आधार पर निर्धारित होगी।

नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना और सीलिंग की कार्रवाई

प्रस्तावित विधेयक में अग्नि सुरक्षा के निर्धारित उपाय नहीं अपनाने वाले भवनों पर आर्थिक दंड लगाने का प्रावधान किया गया है। इसके अनुसार, उल्लंघन की स्थिति में 10 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से जुर्माना या आवश्यक अग्नि सुरक्षा उपकरणों की कुल लागत का डेढ़ गुना तक दंड लगाया जा सकता है।

यदि किसी भवन में अग्नि सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन पाया जाता है, तो अग्निशमन विभाग परिसर खाली कराने और उसे सील करने की कार्रवाई कर सकेगा। इसके अलावा, अग्नि सुरक्षा में लापरवाही के कारण आग लगने से किसी व्यक्ति की मृत्यु या गंभीर चोट होने पर भारतीय न्याय संहिता के तहत आपराधिक कार्रवाई भी की जा सकती है।

विधेयक में आग लगने की झूठी सूचना देने पर भी सख्त कार्रवाई का प्रावधान प्रस्तावित है।

अस्पतालों, होटलों और व्यावसायिक भवनों पर रहेगा विशेष जोर

सरकार का उद्देश्य सार्वजनिक भवनों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में अग्निशमन उपकरण, आपातकालीन निकास और अन्य जरूरी सुरक्षा व्यवस्थाएं सुनिश्चित करना है। नए कानून के माध्यम से अग्नि सुरक्षा मानकों की निगरानी मजबूत करने और नियमों की अनदेखी करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने की व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया है।

विधेयक पेश, लागू होने के लिए जरूरी प्रक्रिया बाकी

उत्तराखंड अग्निशमन एवं आपात सेवा विधेयक, 2026 फिलहाल विधानसभा में पेश किया गया है। इसे कानून के रूप में लागू करने के लिए सदन से पारित होने और निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने की आवश्यकता होगी।

यदि विधेयक अपने प्रस्तावित स्वरूप में कानून बनता है, तो प्रदेश में भवनों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई के लिए नया कानूनी ढांचा उपलब्ध हो सकेगा।

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