डीएम डॉ. आशीष चौहान के निर्देश—नशा तस्करी के नेटवर्क पर करें कार्रवाई, अवैध खेती मिलने पर पटवारी और ग्राम विकास अधिकारी की भी तय होगी जवाबदेही
देहरादून ,
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में नशे के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने और युवाओं को नशे के जाल से बचाने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्तरीय नारकोटिक्स को-ऑर्डिनेशन समिति की बैठक में नशे की मांग और आपूर्ति, दोनों पर प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। शिक्षण संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रमों के साथ ड्रग्स टेस्टिंग अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए दो नई सलाइवा-बेस्ड ड्रग्स टेस्टिंग मशीनों की खरीद हेतु धनराशि भी स्वीकृत की गई।
हर महीने विद्यार्थियों को दिलाई जाएगी नशामुक्ति की शपथ
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कहा कि विद्यार्थी और युवा नशा तस्करों के आसान निशाने पर होते हैं। ऐसे में सभी स्कूलों और कॉलेजों में नशे के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं आर्थिक दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाए। प्रत्येक शिक्षण संस्थान में हर महीने एक दिन निर्धारित कर छात्र-छात्राओं को नशामुक्ति की शपथ दिलाने के साथ ड्रग्स टेस्टिंग अभियान भी संचालित किया जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि नशे के अवैध कारोबार को समाप्त करने के लिए केवल तस्करों के खिलाफ कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि नशे की मांग को कम करना भी जरूरी है। युवाओं को नशे की ओर धकेलने वाले लोगों की पहचान कर उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।
नशामुक्ति केंद्रों और संवेदनशील क्षेत्रों का होगा निरीक्षण
जिलाधिकारी ने सभी उपजिलाधिकारियों को संबंधित थाना प्रभारियों के साथ अपने-अपने क्षेत्रों में नशामुक्ति केंद्रों, शिक्षण संस्थानों और आसपास की मलिन बस्तियों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए। नशे की गिरफ्त में आए लोगों से बातचीत कर फीडबैक लिया जाएगा। उनसे मिलने वाली जानकारियों और सुरागों के आधार पर नशा तस्करी नेटवर्क की कड़ियां जोड़कर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अवैध खेती मिलने पर अधिकारियों की भी तय होगी जवाबदेही
जिले के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में भांग की अवैध खेती को नष्ट करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। कल्याणपुरी में भांग की खेती की शिकायत मिलने पर आबकारी विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर उसे नष्ट कराया। इस मामले में जिलाधिकारी ने संबंधित क्षेत्र के पटवारी और ग्राम विकास अधिकारी की जिम्मेदारी तय करते हुए उनसे स्पष्टीकरण मांगा।
डीएम ने स्पष्ट किया कि जिले में कहीं भी भांग, अफीम, गांजा या चरस की अवैध खेती अथवा कारोबार मिलने पर संबंधित कार्मिकों की जवाबदेही तय की जाएगी।
सितंबर में 147 ड्रग्स टेस्ट, सभी की रिपोर्ट निगेटिव
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि सितंबर 2026 में शिक्षण संस्थानों में रैंडम सैंपलिंग के तहत मेडिकल टीम ने 147 ड्रग्स टेस्ट किए। सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई। नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के लिए स्कूल-कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर हेल्पलाइन नंबर 1933 के पोस्टर एवं पंपलेट लगाए जा रहे हैं।
पुलिस और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) की टीमें लोगों को एनडीपीएस एक्ट की जानकारी देने के साथ नशे से दूर रहने की शपथ भी दिला रही हैं। सितंबर माह में एएनटीएफ ने 95 स्थानों पर चेकिंग अभियान चलाया।
एनडीपीएस एक्ट में 244 मुकदमे, 281 आरोपी गिरफ्तार
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सितंबर 2026 तक देहरादून जिले में एनडीपीएस एक्ट के तहत 244 मुकदमे दर्ज किए गए। इन मामलों में 281 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। वाणिज्यिक मात्रा से संबंधित 15 अभियोग दर्ज किए गए, जिनमें 23 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई।
इसके अतिरिक्त मेडिकल स्टोरों पर छापेमारी के दौरान आठ संदिग्ध दवाओं के नमूने जांच के लिए भेजे गए, जबकि एक मेडिकल स्टोर का लाइसेंस निरस्त किया गया। अधिकारियों ने बताया कि सभी मेडिकल स्टोरों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य किया गया है।
बैठक में अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) स्मृता परमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एम.के. शर्मा, सीओ सदर अंकित भंडारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल, ड्रग्स इंस्पेक्टर विनोद जगूड़ी, जिला शिक्षा अधिकारी प्रेम लाल भारती सहित समिति के अन्य सदस्य वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।
प्रशासन का लक्ष्य युवाओं को नशे से बचाने के साथ तस्करी नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगाना है। जागरूकता अभियान, नियमित ड्रग्स टेस्टिंग और अवैध कारोबार के खिलाफ सख्त कार्रवाई इस दिशा में अहम कदम माने जा रहे हैं।