देहरादून ,
उत्तराखण्ड लोक भवन (पूर्व राजभवन) में राष्ट्रीय सैनिक संस्था की ओर से ‘नई शिक्षा नीति में नैतिक शिक्षा’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा, समाजसेवा और विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले सदस्यों को सम्मानित किया गया।
संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और आधुनिक तकनीक का महत्व लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ-साथ युवाओं में नैतिक मूल्यों, चरित्र निर्माण, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम का विकास भी उतना ही आवश्यक है। उनका कहना था कि विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए संस्कारवान, जिम्मेदार और कर्तव्यनिष्ठ युवा सबसे बड़ी ताकत हैं।
वक्ताओं ने भारतीय ज्ञान परंपरा, वेद, उपनिषद और ऋषि-मुनियों की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि नैतिक शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों के व्यवहार और जीवनशैली में भी उसका प्रतिबिंब दिखाई देना चाहिए।
कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि राष्ट्रीय सैनिक संस्था तथा पूर्व सैनिकों का अनुभव नई पीढ़ी में नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, सेवा भाव और राष्ट्रीय चेतना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उनके अनुभवों से युवा पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरणा मिलेगी।
संगोष्ठी में शिक्षा जगत से जुड़े विशेषज्ञों, पूर्व सैनिकों, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया तथा नई शिक्षा नीति में नैतिक शिक्षा के महत्व पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम के अंत में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले सदस्यों को सम्मानित किया गया।