देहरादून ,
देहरादून में मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की आवासीय योजनाएं आम जनता की पहुंच से दूर होती जा रही हैं। प्राधिकरण की “पहले आओ–पहले पाओ” नीति पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि पर्याप्त जमीन होने के बावजूद योजनाओं का लाभ सीमित लोगों तक ही पहुंच पा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 में योजना लागू होने के बाद से स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। जमीन उपलब्ध होने के बावजूद निर्माण कार्य अपेक्षित गति से नहीं हो पा रहा, जिससे आम लोगों को प्लॉट या आवास मिलने में दिक्कतें आ रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि “पहले आओ–पहले पाओ” प्रणाली पारदर्शी जरूर दिखती है, लेकिन व्यवहारिक रूप से यह सभी वर्गों के लिए समान अवसर सुनिश्चित नहीं कर पा रही। खासतौर पर मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोग इस प्रक्रिया में पीछे छूट जाते हैं।
वहीं, निर्माण कार्यों में देरी और बढ़ती लागत भी एक बड़ी समस्या बनकर सामने आई है। इससे न केवल योजनाएं प्रभावित हो रही हैं, बल्कि आम आदमी के लिए आवास खरीदना और भी मुश्किल होता जा रहा है।
शहरी विकास विशेषज्ञों का कहना है कि एमडीडीए को अपनी नीतियों में सुधार करते हुए अधिक समावेशी और पारदर्शी व्यवस्था लागू करनी चाहिए, ताकि जरूरतमंद लोगों को भी योजनाओं का वास्तविक लाभ मिल सके।
अगर समय रहते सुधार नहीं किए गए, तो देहरादून में आवासीय योजनाएं केवल चुनिंदा लोगों तक सीमित रह जाएंगी और आम नागरिकों के लिए घर का सपना अधूरा ही रह जाएगा।
