देहरादून ,
उत्तराखंड सरकार ने शहरी क्षेत्रों में बढ़ते प्रदूषण और कूड़ा निस्तारण की समस्या से निपटने के लिए एक अहम और युगांतकारी फैसला लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के सभी 11 नगर निगमों में पहली बार विशेषज्ञ पर्यावरण इंजीनियर (Environmental Engineers) तैनात करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है।
अब तक नगर निगमों में मुख्य रूप से सिविल या मैकेनिकल इंजीनियर ही तैनात होते थे, लेकिन पर्यावरण प्रबंधन की बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए विशेष रूप से प्रशिक्षित पर्यावरण इंजीनियरों की नियुक्ति की जाएगी। सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से देहरादून, हरिद्वार और हल्द्वानी समेत अन्य शहरों की स्वच्छता रैंकिंग में बड़ा सुधार होगा।
क्यों पड़ी पर्यावरण इंजीनियरों की जरूरत?
तेजी से बढ़ते शहरीकरण और पर्यटन के दबाव के कारण राज्य के शहरों को नई पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है:
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वेस्ट मैनेजमेंट: सॉलिड वेस्ट और ई-वेस्ट के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की कमी थी।
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बढ़ता प्रदूषण: नदियों में गिरते सीवेज और बढ़ते वायु प्रदूषण की निगरानी के लिए विशेषज्ञों की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।
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एनजीटी मानक: National Green Tribunal (NGT) के कड़े पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी दक्षता अनिवार्य हो गई थी।
कैबिनेट फैसले की मुख्य बातें
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सीधी भर्ती: इन पदों पर भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। पर्यावरण विज्ञान या इंजीनियरिंग में विशेष योग्यता रखने वाले युवाओं को अवसर मिलेगा।
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ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस: रेन वॉटर हार्वेस्टिंग, ग्रीन बेल्ट और अन्य पर्यावरण अनुकूल परियोजनाओं में इन इंजीनियरों की अहम भूमिका होगी।
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11 नगर निगमों को लाभ: देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश, रुड़की, काशीपुर, रुद्रपुर, हल्द्वानी, कोटद्वार, श्रीनगर और अल्मोड़ा सहित सभी बड़े शहरी निकाय इस व्यवस्था से लाभान्वित होंगे।
स्वच्छता और स्वास्थ्य पर सीधा असर
विशेषज्ञों के अनुसार, इस निर्णय के दूरगामी परिणाम देखने को मिलेंगे:
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नदियों का संरक्षण: गंगा और उसकी सहायक नदियों में गिरने वाले शहरी अपशिष्ट को रोकने के लिए ‘सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट’ (STP) की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी।
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स्वच्छ सर्वेक्षण में सुधार: राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले स्वच्छ सर्वेक्षण में राज्य के शहरों की रैंकिंग बेहतर होने की उम्मीद है।
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स्मार्ट सिटी मिशन को बल: स्मार्ट सिटी मिशन के तहत चल रहे पर्यावरण अनुकूल कार्यों को गति मिलेगी।
राज्य सरकार का मानना है कि यह कदम न केवल शहरी स्वच्छता को मजबूत करेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में भी सकारात्मक बदलाव लाएगा।