ऋषिकेश,
जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सविन बंसल की संस्तुति पर ऋषिकेश के उप निबंधक को निलंबित कर मुख्यालय से संबद्ध कर दिया है। उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। यह कदम आमजन से लगातार मिल रही शिकायतों और जिलाधिकारी द्वारा किए गए औचक निरीक्षण के आधार पर उठाया गया।
औचक निरीक्षण में मिली गंभीर अनियमितताएं
ऋषिकेश स्थित सब रजिस्ट्रार कार्यालय के निरीक्षण में कई गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं। जांच में पाया गया कि उप निबंधक की अनुपस्थिति में लिपिक द्वारा अवैधानिक रूप से विलेखों का पंजीकरण किया जा रहा था।
कार्यालय में फर्जी या ‘घोस्ट’ कार्मिक कार्यरत पाए गए, जिनके पास न तो नियुक्ति पत्र था और न ही उपस्थिति पंजिका में उनका नाम दर्ज था। इसके अलावा संपत्ति मूल्यांकन का पर्याप्त ज्ञान न होने के बावजूद स्टांप शुल्क स्वीकृत किए जाने का मामला भी सामने आया।
करोड़ों के राजस्व नुकसान की आशंका
जिलाधिकारी के निरीक्षण में यह भी खुलासा हुआ कि औद्योगिक क्षेत्रों की भूमि को आवासीय दरों पर दर्शाकर छोटे-छोटे भूखंडों में कई रजिस्ट्रियां कराई गईं। इससे शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान की आशंका जताई गई है।
जांच में दून घाटी विशेष महायोजना-2031 के नियमों के उल्लंघन की भी पुष्टि हुई है।
वर्षों से लंबित पड़े आमजन के अभिलेख
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि बड़ी संख्या में नागरिकों के मूल विलेख महीनों और वर्षों से अलमारियों में दबाकर रखे गए थे, जबकि नियमानुसार अधिकतम तीन दिन में अभिलेख लौटाना अनिवार्य है।
अर्जेंट रजिस्ट्री नकल, जिसे 24 घंटे के भीतर उपलब्ध कराया जाना चाहिए, वह भी महीनों और वर्षों से लंबित मिली। मौके पर मौजूद फरियादियों ने अपनी समस्याएं बताते हुए गंभीर आरोप लगाए।
नियमों की खुली अनदेखी
संयुक्त जांच में यह भी सामने आया कि उप निबंधक द्वारा भारतीय स्टांप (उत्तराखंड संशोधन) अधिनियम 2015 की धारा 47(क), भारतीय रजिस्ट्रेशन मैनुअल के नियम 325, 195 व 196 तथा उत्तराखंड शासन की भ्रष्टाचार उन्मूलन संबंधी अधिसूचना का पालन नहीं किया गया।
जिला प्रशासन ने मामले को गंभीर मानते हुए विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं।