‘स्पर्श हिमालय महोत्सव 2025’ में भारत की संस्कृति, साहित्य और अध्यात्म का संगम
मुख्य अतिथि किरेन रिजिजू बोले – हिमालय केवल पर्वत नहीं, भारत की आत्मा हैं
‘लेखक ग्राम’ पहल को बताया भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक
देहरादून ,
राजधानी देहरादून के ‘लेखक ग्राम’ में सोमवार को “स्पर्श हिमालय महोत्सव 2025” का भव्य आयोजन हुआ। यह आयोजन उत्तराखंड राज्य के गठन के 25 वर्ष और अटल बिहारी वाजपेयी जी के ‘लेखक ग्राम’ के स्वप्न के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में समर्पित था। महोत्सव का विषय था — “अंतर्राष्ट्रीय साहित्य, संस्कृति एवं कला महोत्सव”।
कार्यक्रम में भगवान धनवंतरि की प्रतिमा का लोकार्पण भी किया गया। इस अवसर पर साहित्य, कला, संस्कृति और अध्यात्म के अनेक विद्वान एवं साधक उपस्थित रहे।
केंद्रीय मंत्री रिजिजू का संदेश: “हिमालय भारत की आत्मा हैं”
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू ने कहा कि वे स्वयं अरुणाचल प्रदेश से हैं, और इसलिए हिमालय से उनका भावनात्मक रिश्ता है।
उन्होंने कहा —
“हिमालय केवल पर्वत नहीं हैं, बल्कि भारत की शक्ति, आध्यात्मिकता और पहचान के प्रतीक हैं। इनसे हमारी सभ्यता, संस्कृति और अस्तित्व जुड़ा हुआ है।”
श्री रिजिजू ने ‘लेखक ग्राम’ पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह भारत के सांस्कृतिक, साहित्यिक और पारिस्थितिक पुनर्जागरण का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि जब रचनात्मकता गांवों से जुड़ेगी, तब भारत का वास्तविक विकास संभव होगा।
निशंक ने हिमालय और रचनात्मकता को जोड़ा
कार्यक्रम के आयोजक एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने श्री रिजिजू का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव न केवल उत्तराखंड की उपलब्धियों का उत्सव है, बल्कि अटल बिहारी वाजपेयी के ‘ग्राम भारत’ के स्वप्न को साकार करने का प्रयास भी है।
उन्होंने बताया कि ‘लेखक ग्राम’ का उद्देश्य गांवों को रचनात्मकता, संस्कृति और शिक्षा के केंद्रों के रूप में विकसित करना है।
आचार्य बालकृष्ण और स्वामी अवधेशानंद गिरि का संबोधन
आचार्य बालकृष्ण, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, पतंजलि योगपीठ ने भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, आयुर्वेद और हिमालयी पारिस्थितिकी के संरक्षण में पतंजलि के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने श्री रिजिजू का हार्दिक स्वागत करते हुए कहा कि हिमालय की गोद में संस्कृति और विज्ञान दोनों का संगम है।
स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने आशीर्वचन देते हुए कहा कि जीवन में अध्यात्म, सेवा और नैतिक अनुशासन का पालन ही सच्चे विकास की दिशा है।
सम्मान एवं समापन
प्रो. पृथ्वीराज, उपाध्यक्ष, ने डॉ. निशंक के हिमालयी एवं सांस्कृतिक विकास में योगदान की सराहना की और उन्हें सम्मानस्वरूप स्मृति चिन्ह भेंट किया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. निशंक ने धन्यवाद ज्ञापन देते हुए कहा कि श्री किरेन रिजिजू के प्रेरणादायी शब्दों ने हिमालय और जनमानस के बीच की आध्यात्मिक कड़ी को पुनः सशक्त बना दिया।
संक्षेप में
‘स्पर्श हिमालय महोत्सव 2025’ न केवल संस्कृति, साहित्य और अध्यात्म का संगम बना, बल्कि उसने हिमालय की गोद में बसे भारत की आत्मा को एक बार फिर स्पर्श किया — जैसे उसके नाम का अर्थ ही हो, “हिमालय का स्पर्श, भारत की आत्मा का स्पंदन।”

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