हरिद्वार ,
धार्मिक नगरी हरिद्वार का पंत दीप – जो कभी हरियाली और आस्था का प्रतीक था – अब नगर निगम की लापरवाही और निजी कंपनी की मनमानी से अवैध कूड़ा-घर बन चुका है। गंगा किनारे कचरे का यह ढेर न केवल NGT और CPCB के नियमों का उल्लंघन है, बल्कि गायों की मौत और गंगा की मर्यादा पर भी बड़ा हमला है।
📌 संकट की तस्वीर
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हरे-भरे पार्क से कचरे के पहाड़ तक – पंत दीप, जहां तीर्थयात्री विश्राम करते थे, अब बदबू और गंदगी से भर गया है।
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बरसात में खतरा – बारिश का पानी कचरे को गंगा में बहा देता है, जिससे जल प्रदूषण और बीमारियों का खतरा बढ़ता है।
🐄 गायों की मौत
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आवारा गायें कचरे से प्लास्टिक और सड़ी सामग्री खाकर बीमार पड़ रही हैं।
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पशुप्रेमी संगठनों का अनुमान – एक साल में 200 से ज्यादा गायों की मौत।
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यह स्थिति प्रशासन की संवेदनहीनता और गंगा तट की पवित्रता पर कलंक दोनों है।
🚨 प्रशासन और कंपनी पर सवाल
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नगर निगम ने सफाई का जिम्मा इकॉन वाटर ग्रेस कंपनी को दिया, जिस पर वैज्ञानिक निस्तारण की जगह गंगा किनारे कचरा फेंकने के आरोप।
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NGT के आदेशों और गंगा संरक्षण अधिनियम, 2016 की धज्जियाँ उड़ाई गईं।
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नगर निगम का दावा – “डंपिंग अस्थायी है”, जबकि यह वर्षों से जारी है।
❓ अहम सवाल
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क्या जिला प्रशासन इस गंभीर उल्लंघन पर कार्रवाई करेगा?
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क्या नगर निगम और कंपनी पर भारी जुर्माना और आपराधिक मुकदमा दर्ज होगा?
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या फिर गंगा की निर्मलता, गायों की जान और हरिद्वार की आस्था का अपमान यूं ही जारी रहेगा?