देहरादून ,
राज्य में निर्माणाधीन और प्रस्तावित रेल परियोजनाओं को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल लाइन, टनकपुर–बागेश्वर रेल लाइन तथा कर्णप्रयाग से बागेश्वर तक रेल विस्तार की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रस्तावित रेल परियोजनाओं में टनलों के साथ बनने वाली एस्केप टनलों को भविष्य में पैरेलल रोड के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए। विशेष रूप से ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना में निर्मित एस्केप टनलों के बहुउद्देशीय उपयोग पर भी अध्ययन करने को कहा गया।
कर्णप्रयाग से बागेश्वर तक विस्तार पर जोर
सीएम ने अधिकारियों को कर्णप्रयाग से बागेश्वर तक रेल लाइन विस्तार की व्यवहार्यता पर कार्य करने के निर्देश दिए। साथ ही टनकपुर–बागेश्वर रेल लाइन परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने को कहा। इस परियोजना के अंतर्गत रेलवे द्वारा तीन सर्वेक्षण विकल्प प्रस्तावित किए गए हैं। अल्मोड़ा और सोमेश्वर क्षेत्र को इस रेल मार्ग से जोड़ने की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से टनकपुर–बागेश्वर रेल लाइन को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किए जाने का आग्रह करने के निर्देश भी दिए, ताकि निर्माण कार्य को गति मिल सके।
रेलवे स्टेशनों के लिए इंटीग्रेटेड प्लान
सीएम धामी ने कहा कि ऋषिकेश–कर्णप्रयाग परियोजना के तहत प्रस्तावित रेलवे स्टेशनों के लिए इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट प्लान तैयार किया जाए। स्टेशनों के आसपास स्थानीय बाजार विकसित हों और स्वयं सहायता समूहों को स्थानीय उत्पादों की बिक्री के लिए विशेष स्थान उपलब्ध कराया जाए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रस्तावित रेलवे स्टेशनों के आसपास अभी से लोगों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया जाए। होमस्टे और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जाए। साथ ही स्टेशनों के आसपास स्थित गांवों, कस्बों, धार्मिक और पर्यटन स्थलों के विकास के लिए रोडमैप तैयार किया जाए।
परियोजना की प्रगति
बैठक में जानकारी दी गई कि ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना का 72.5 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है, जबकि टनल निर्माण का 95.30 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो गया है। परियोजना के अंतर्गत कुल 28 टनल बनाई जा रही हैं, जिनमें 16 मुख्य टनल और 12 एस्केप टनल शामिल हैं।
विभिन्न रेलवे स्टेशनों का निर्माण अलग-अलग थीम पर किया जा रहा है।
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शिवपुरी – नीलकंठ महादेव
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ब्यासी – महर्षि वेदव्यास
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देवप्रयाग – समुद्र मंथन
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जनासु – उत्तराखंड संस्कृति
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मलेथा – वीर माधो सिंह भंडारी
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श्रीनगर – मां राजराजेश्वरी देवी
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धारी देवी – मां धारी देवी
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तिलनी – केदारनाथ
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घोलतीर – पांच महादेव
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गौचर – बाल गोविंद कृष्ण
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कर्णप्रयाग – बद्रीनाथ एवं राधा-कृष्ण थीम
मुख्यमंत्री ने कहा कि रेल परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद उत्तराखंड में आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि होगी। ऐसे में अभी से समुचित पुनर्विकास और आधारभूत सुविधाओं की तैयारी सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में आवागमन सुगम और सुव्यवस्थित हो सके।