उत्तराकाशी ,
अप्रैल 2025 की एक तस्वीर में धराली का इलाका पंखे के आकार जैसा दिखता है। यह वास्तव में सदियों से बहती ‘खीर गाड़’ नदी द्वारा बनाया गया प्राकृतिक एलुवियल फैन है, जो नीचे भागीरथी नदी में मिलती है।
स्थानीय लोगों ने भागीरथी की मुख्य धारा के भीतर तक पत्थरों की मजबूत दीवार खड़ी कर दी और खीर गाड़ के बहाव को मोड़ने के लिए उसके किनारे-किनारे पुश्ते बना दिए। इन कृत्रिम संरचनाओं के सहारे यहां मकान, होटल और बाग़ीचे खड़े कर दिए गए—मानो मौसमी नदी पर हमेशा के लिए काबू पा लिया गया हो।
लेकिन सदियों में कई बार आने वाले तेज़ सैलाब ने इस भू-आकृति को बनाया है। इस बार भी कीचड़ और मलबे का बहाव पुश्ते तोड़कर उसी समतल ज़मीन पर फैल गया, जिसे प्रकृति ने नदी के लिए सुरक्षित रखा था।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस इलाके में कभी निर्माण नहीं होना चाहिए था। पहाड़ों और देहरादून के आसपास ऐसे कई उदाहरण हैं, जहां नदी के प्राकृतिक मार्ग पर बसावट बनाकर खतरा खुद बुलाया जा रहा है।