देहरादून,
टेबल टेनिस में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली श्री गुरु राम राय पब्लिक स्कूल, रेसकोर्स की छात्रा स्तुति कुकरेती को उनके शानदार खेल कौशल और राज्य का नाम रोशन करने पर श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय द्वारा सम्मानित किया गया।
महंत देवेंद्र दास जी महाराज ने दी बधाई, ₹25,000 का चेक भेंट
श्री दरबार साहिब में आयोजित सम्मान समारोह में एसजीआरआर विश्वविद्यालय के माननीय प्रेसीडेंट श्रीमहंत देवेंद्र दास जी महाराज ने स्तुति को ₹25,000 का प्रोत्साहन राशि का चेक प्रदान कर उनका सम्मान किया। इस अवसर पर उन्होंने छात्रा की सराहना करते हुए कहा कि “प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना समाज और संस्थान की जिम्मेदारी है।”
प्रतियोगिता में 130 प्रतिभागी, 17 प्रतिष्ठित स्कूलों की भागीदारी
स्तुति कुकरेती ने हाल ही में मसूरी के सेंट जॉर्ज कॉलेज में आयोजित 19वीं मेनोराइट इन्विटेशनल टेबल टेनिस प्रतियोगिता में अंडर-19 बालिका वर्ग में विजेता बनने का गौरव प्राप्त किया। इस प्रतियोगिता में देशभर के 17 प्रतिष्ठित स्कूलों के कुल 130 छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया था। फाइनल मुकाबले में स्तुति ने वेल्हम गर्ल्स की रिहा ममगाईं को स्ट्रेट सेट्स में 3-0 से पराजित कर खिताब अपने नाम किया।
विद्यालय और अभिभावकों को गर्व
विद्यालय की प्रधानाचार्य प्रतिभा अत्री ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा:
“स्तुति न केवल पढ़ाई में मेधावी है, बल्कि खेल के क्षेत्र में भी अनुकरणीय प्रदर्शन कर रही है।”
उन्होंने बताया कि एसजीआरआर ग्रुप के शिक्षा मिशन के तहत हर क्षेत्र में प्रतिभावान विद्यार्थियों को प्रोत्साहन और समर्थन दिया जाता है।
स्तुति के पिता श्री सुयश कुकरेती अधिवक्ता हैं और माता श्रीमती कल्पना कुकरेती उत्तराखंड सरकार की सेवा में कार्यरत हैं। विद्यालय के शारीरिक शिक्षक अनिल चंद्र कंडवाल ने स्तुति को प्रतियोगिता के लिए प्रशिक्षित और प्रेरित किया।
खुशी और प्रेरणा का माहौल
स्तुति की इस जीत ने न केवल विद्यालय में गर्व का वातावरण बनाया है, बल्कि उनके साथी छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन गई है।
“श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय और एसजीआरआर एजुकेशन मिशन का संकल्प है कि वह प्रतिभाओं को मंच, मार्गदर्शन और मान्यता प्रदान करता रहेगा।”
🟣 स्तुति की सफलता न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि उत्तराखंड की बेटियों के लिए एक प्रेरणास्रोत भी है।
एसजीआरआर ग्रुप की यह पहल बताती है कि खेल और शिक्षा दोनों में संतुलन से ही संपूर्ण व्यक्तित्व का विकास संभव है।