देहरादून में पहली बार स्थापित हुए आधुनिक लांग रेंज इमरजेंसी सायरन, आपदा व हमले की स्थिति में देंगे चेतावनी

देहरादून ,

जिले में आपातकालीन हालातों के मद्देनज़र जिला प्रशासन ने बड़ी पहल करते हुए आधुनिक लांग रेंज इमरजेंसी सायरन लगाने की शुरुआत कर दी है। जिलाधिकारी सविन बंसल की पहल पर यह सिस्टम राज्य में पहली बार देहरादून जनपद में लागू किया जा रहा है।

🔊 पहले चरण में 13 स्थानों पर सायरन

शुरुआती चरण में घनी आबादी वाले 13 प्रमुख स्थानों पर ये सायरन स्थापित किए गए हैं। इनमें से 9 सायरन 8 किलोमीटर रेंज के हैं जबकि 4 सायरन 16 किलोमीटर की लंबी रेंज में सुनाई देंगे।

स्थापित किए गए प्रमुख स्थान:

  • 8 किमी रेंज वाले: पटेलनगर, राजपुर, डालनवाला, कैंट, कोतवाली, बसंत विहार, बिंदाल चौकी, लक्खीबाग/पुलिस लाइन, नेहरू कॉलोनी

  • 16 किमी रेंज वाले: ऋषिकेश, प्रेमनगर, क्लेमेंटाउन, रायपुर

सायरनों की ट्रिगरिंग सुविधा संबंधित थाना-चौकियों के साथ-साथ जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र में भी उपलब्ध रहेगी।

🚨 आपदा और हमले जैसी स्थिति में मिलेगा अलर्ट

इन सायरनों का मुख्य उद्देश्य आपदा, युद्ध, या बाहरी हमले जैसी आपात स्थितियों में नागरिकों को समय रहते अलर्ट करना है, ताकि लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंच सकें। सायरन की आवाज पूरे क्षेत्र में एकसमान रूप से गूंजेगी।

🛰️ हाईटेक संचार तंत्र भी तैयार

डीएम बंसल की अगुवाई में जिला प्रशासन ने पहली बार देहरादून में रेपिड कम्युनिकेशन सिस्टम की भी स्थापना शुरू की है, जो कि आर्मी, पैरामिलिट्री, एयरपोर्ट और बड़े अस्पतालों जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों को आपस में जोड़ेगा। इससे किसी भी आपात स्थिति में एक साथ सभी संस्थानों को अलर्ट भेजा जा सकेगा।

🛡️ दूसरा चरण जल्द

दूसरे चरण में ऋषिकेश, विकासनगर और चकराता जैसे क्षेत्रों को इस सायरन सिस्टम से जोड़ा जाएगा।

📜 इतिहास और वर्तमान ज़रूरत

1970 के दशक में स्थापित पुराने सायरन अब शहर की बढ़ती आबादी और घनी बस्तियों के लिए अपर्याप्त साबित हो रहे थे। नए सायरनों की खरीद कर उनका सफल परीक्षण किया जा चुका है।

✅ लाभ

  • त्वरित सार्वजनिक चेतावनी प्रणाली

  • सिविल डिफेंस सिस्टम को मजबूती

  • बड़ी आपदा के समय समन्वित प्रतिक्रिया प्रणाली

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