राजभवन में 30 जुलाई को होगा एमओयू, सीएसआर फंड से होंगे विद्यालय सशक्त
देहरादून, 28 जुलाई।
उत्तराखंड सरकार राज्य के दूरस्थ व पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित करीब 550 राजकीय प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों को आधुनिक संसाधनों से सुसज्जित करने के लिए कॉरपोरेट समूहों के साथ एक ऐतिहासिक साझेदारी करने जा रही है। आगामी 30 जुलाई को राजभवन देहरादून में राज्यपाल ले. जनरल (से.नि.) गुरमीत सिंह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में इस संबंध में एमओयू (MOU) हस्ताक्षरित किए जाएंगे।
उद्योग जगत के सहयोग से शिक्षा में नवाचार
विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि यह पहल राज्य के शिक्षा क्षेत्र को नई दिशा देने की मंशा से शुरू की गई है। इसमें प्रत्येक कॉरपोरेट समूह एक प्राथमिक और एक माध्यमिक विद्यालय को गोद लेकर वहां CSR (कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी) फंड के माध्यम से संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा।
किन सुविधाओं से होंगे स्कूल सुसज्जित?
इस पहल के तहत विद्यालयों में निम्नलिखित आधारभूत और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी:
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मॉडल क्लासरूम
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कम्प्यूटर और साइंस लैब
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पुस्तकालय और आधुनिक फर्नीचर
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शौचालय और पेयजल व्यवस्था
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खेल सामग्री व मैदान
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चहारदीवारी और अन्य अवस्थापना सुविधाएं
पर्वतीय क्षेत्रों को विशेष वरीयता
इस योजना में पर्वतीय व दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यालयों को प्राथमिकता दी गई है, जहां भौगोलिक कठिनाइयों के चलते संसाधनों की कमी अक्सर देखी जाती है। यह पहल इन विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप बेहतर शैक्षिक वातावरण देने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
व्यावसायिक शिक्षा को भी मिलेगा बढ़ावा
डॉ. रावत ने जानकारी दी कि उत्तराखंड के करीब 559 स्कूलों में व्यावसायिक पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं। इन्हें उद्योगों से जोड़ने के बाद, पाठ्यक्रमों को इंडस्ट्री की आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा, जिससे छात्रों को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण मिल सकेगा।
एक नई शिक्षा क्रांति की ओर कदम
राज्य सरकार की इस पहल को शिक्षा क्षेत्र में एक परिवर्तनकारी कदम माना जा रहा है। शिक्षा विभाग और उद्योग जगत के बीच यह साझेदारी न केवल संसाधनों की भरपाई करेगी, बल्कि राजकीय विद्यालयों की गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार लाएगी।
निष्कर्ष
30 जुलाई को होने जा रहा यह कार्यक्रम उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था में कॉरपोरेट सहयोग के माध्यम से सुधार की दिशा में एक ऐतिहासिक शुरुआत है। यदि यह मॉडल सफल होता है तो यह अन्य राज्यों के लिए भी आदर्श बन सकता है।