भू-धंसाव से मंदिर संरचना को खतरा, CBRI, ASI, GSI से अध्ययन रिपोर्ट की सिफारिश
देहरादून, 28 जुलाई।
विश्व में सबसे ऊंचाई पर स्थित शिव मंदिर — तुंगनाथ मंदिर के संरक्षण को लेकर श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के पूर्व अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने रविवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर संरक्षण व जीर्णोद्धार कार्यों को प्राथमिकता देने का अनुरोध किया।
अजेंद्र ने इस संबंध में मुख्यमंत्री को औपचारिक ज्ञापन सौंपते हुए बताया कि 12,073 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर न केवल पौराणिक महत्व रखता है, बल्कि यह पंच केदारों में तृतीय केदार के रूप में भी प्रतिष्ठित है। उन्होंने कहा कि यह प्राचीन धरोहर देश की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का प्रतीक है, जिसे वर्तमान में भू-धंसाव व जल रिसाव जैसी समस्याओं से खतरा उत्पन्न हो गया है।
मुख्य समस्याएं व चुनौतियां
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मंदिर के पत्थरों के बीच दरारें उभर आई हैं
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गर्भगृह में वर्षा का पानी रिसने लगा है
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क्षेत्रीय भू-संरचना में सूक्ष्म अस्थिरता के संकेत
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भविष्य में संरचना को गंभीर क्षति की आशंका
पूर्व अध्यक्ष के कार्यकाल में उठाए गए कदम
अजेंद्र अजय ने बताया कि बीकेटीसी के अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने:
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तुंगनाथ मंदिर परिसर के जीर्णोद्धार, मरम्मत और सौंदर्यीकरण के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की थी।
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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) और केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (CBRI) से विस्तृत तकनीकी अध्ययन कराया था।
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CBRI की निगरानी में निर्माण कार्यों की डीपीआर व डिजाइन तैयार करने के लिए शासन से अनुमति भी प्राप्त की थी।
हालांकि, उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद इस दिशा में कोई महत्वपूर्ण प्रगति नहीं हो पाई।
अब त्वरित हस्तक्षेप की जरूरत
अजेंद्र ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि:
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राज्य सरकार द्वारा CBRI की निगरानी में पुनः कार्यों को आगे बढ़ाया जाए
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मंदिर की मौजूदा स्थिति का वैज्ञानिक व तकनीकी आकलन कर जरूरी संरक्षण उपाय लागू किए जाएं
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मंदिर समिति के वर्तमान बोर्ड को जल्द निर्देश दिए जाएं, ताकि प्राचीन मंदिर की अवशेषता और संरचनात्मक सुरक्षा को अक्षुण्ण रखा जा सके।
तुंगनाथ मंदिर: धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर
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स्थान: रुद्रप्रयाग जनपद, उत्तराखंड
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ऊंचाई: समुद्र तल से 12,073 फीट
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महत्व: पंच केदारों में तृतीय केदार
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विशेषता: विश्व का सबसे ऊंचाई पर स्थित शिव मंदिर
निष्कर्ष
तुंगनाथ मंदिर उत्तराखंड की आध्यात्मिक पहचान का अहम हिस्सा है। भूगर्भीय परिवर्तनों की चुनौती से जूझ रहे इस मंदिर की संरक्षा और संरचनात्मक मजबूती अब न केवल राज्य सरकार की प्राथमिकता, बल्कि राष्ट्रीय धरोहर संरक्षण का विषय भी बन चुकी है। मुख्यमंत्री से हुई इस मुलाकात से उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही आवश्यक संरक्षण कार्यों को गति दी जाएगी।