देहरादून,
“नशा मुक्त उत्तराखंड” के संकल्प को साकार करने की दिशा में जिला प्रशासन देहरादून ने ऐतिहासिक पहल करते हुए राज्य का पहला सरकारी नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र स्थापित करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में जिलाधिकारी सविन बंसल ने इस केंद्र की स्थापना के लिए 57.04 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया है। यह केंद्र देहरादून के रायवाला स्थित राजकीय वृद्धाश्रम परिसर में संचालित किया जाएगा।
🔹 प्रशासन का पहला नशा मुक्ति केंद्र: विषाक्त जीवन के लिए आशा की नई किरण
इस केंद्र की स्थापना से उत्तराखंड में सरकारी स्तर पर नशा मुक्ति सेवाओं की औपचारिक शुरुआत होगी। डीएम बंसल ने बताया कि यह केंद्र नशे की गिरफ्त में आए लोगों के लिए जीवन में बदलाव की अंतिम आशा बनकर उभरेगा।
राजकीय वृद्धाश्रम, रायवाला के प्रथम तल में संचालित होने वाले इस केंद्र में—
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13 कमरे,
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1 हॉल,
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2 कार्यालय कक्ष उपलब्ध होंगे,
जहाँ कुल 30 बिस्तर की व्यवस्था की गई है।
💰 बजट का विभाजन इस प्रकार है:
| मद | राशि (₹ लाख में) |
|---|---|
| 6 माह के लिए 22 पदों का मानदेय | 22.56 |
| भवन अनुरक्षण, बिजली-पानी, भोजन, दवाइयां, वाहन आदि | 9.48 |
| उपकरण व फर्नीचर (गद्दे, कंप्यूटर, बायोमेट्रिक मशीन आदि) | 25.00 |
| कुल | 57.04 लाख |
🔸 एनजीओ के माध्यम से संचालन
इस केंद्र का संचालन अनुभवी स्वैच्छिक संस्था (NGO) के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए समिति गठित कर निर्धारित प्रक्रिया के तहत चयन किया जाएगा। जिलाधिकारी ने समाज कल्याण विभाग को शीघ्र संचालन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
🛏️ केंद्र में उपलब्ध सुविधाएं:
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रजिस्ट्रेशन कक्ष
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ओपीडी
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आइसोलेटेड रूम
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स्टाफ रूम
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स्टोर रूम
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वेटिंग एरिया
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मनोरोग उपचार, काउंसलिंग, भोजन व दवा की सुविधाएं
🗣️ जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा—
“समाज में नशा एक विकराल समस्या बन चुकी है। इस बुराई से जूझ रहे व्यक्तियों को वापस मुख्यधारा में लाने के लिए व्यवस्थित, संवेदनशील और प्रभावी उपचार की आवश्यकता है। रायवाला में प्रस्तावित यह केंद्र एक नई शुरुआत है।”
👥 बैठक में उपस्थित अधिकारी:
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मुख्य विकास अधिकारी: अभिनव शाह
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी: डॉ. एमके शर्मा
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जिला समाज कल्याण अधिकारी: दीपांकर घिल्डियाल
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निदेशक, सोशल वेलफेयर: जगमोहन सिंह कफोला
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आरडब्लूडी अधिशासी अभियंता: विनीत कुरील
यह पहल उत्तराखंड को “नशा मुक्त राज्य” बनाने की दिशा में एक मजबूत प्रशासनिक संकल्प को दर्शाती है, और अन्य जनपदों के लिए एक आदर्श मॉडल बन सकती है।