संस्कृत शिक्षा के नव युग की ओर उत्तराखंड: श्रृंगेरी से प्रेरित शिक्षा मॉडल से होगी सांस्कृतिक पुनर्जागरण की शुरुआत

देहरादून ,

उत्तराखंड के संस्कृत शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कर्नाटक के श्रृंगेरी स्थित राजीव गांधी परिसर, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय का भ्रमण कर वहां की शैक्षिक गतिविधियों का गहन अवलोकन किया। मंत्री ने छात्र-छात्राओं और आचार्यों से संवाद कर गुरुकुल परंपरा व आधुनिक शिक्षा प्रणाली के समन्वित मॉडल की जानकारी ली।

श्रृंगेरी, जिसे आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार पीठों में से एक माना जाता है, भारतीय ज्ञान परंपरा, वेद-वेदांग और सांस्कृतिक साधना का प्रतिष्ठित केंद्र है। यही पर स्थित केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय का राजीव गांधी परिसर गुरुकुल परंपरा और आधुनिक तकनीकों का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।

🔸 “उत्तराखंड में होगा संस्कृत शिक्षा का नव जागरण”

मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा—

“श्रृंगेरी परिसर में पारंपरिक संस्कृत शिक्षा और आधुनिक विषयों का जो समन्वय देखा, वह अत्यंत प्रेरणादायक है। छात्र यहां गहन अध्ययन में रत हैं और आचार्य उन्हें तपोवन जैसी शांति में दिशा दे रहे हैं। उत्तराखंड जैसे सांस्कृतिक राज्य के लिए यह मॉडल अत्यंत उपयुक्त है।”

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार संस्कृत शिक्षा के सशक्तिकरण के लिए ठोस योजनाओं पर कार्य कर रही है, जिनमें प्रमुख हैं:

  • संस्कृत विद्यालयों व महाविद्यालयों की अधोसंरचना का आधुनिकीकरण

  • डिजिटल माध्यम से पाठ्यक्रमों की उपलब्धता

  • संस्कृत में रोजगारोन्मुखी विषयों की शुरुआत

  • गुरुकुल आधारित शिक्षा पद्धति को पुनर्जीवित करना

  • ‘संपूर्ण संस्कृत ग्राम’ की स्थापना

  • संस्कृत में नवाचार को प्रोत्साहन

🔹 केंद्र सरकार से सहयोग की पहल

डॉ. रावत ने यह भी जानकारी दी कि केंद्र सरकार के सहयोग से उत्तराखंड में संस्कृत शिक्षा के लिए कई योजनाएं प्रस्तावित हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • संस्कृत विश्वविद्यालय की नई शाखाओं की स्थापना

  • ऑनलाइन संस्कृत पोर्टल का विकास

  • संस्कृत स्नातकों के लिए विशेष स्कॉलरशिप योजना

🔸 उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल रहा साथ

इस अवसर पर मंत्री के साथ संस्कृत सचिव श्री दीपक कुमार, कुलपति श्री दिनेश चंद्र शास्त्री, निदेशक आनंद भारद्वाज, सचिव वाजश्रवा आर्य, श्री हरीश गुरुरानी, और श्री किशोरी लाल उपस्थित रहे।

श्रृंगेरी परिसर से केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के सह-निदेशक प्रो. चंद्रकांत, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नारायण वैद्य एवं डॉ. विवेकशील पाठक सहित अनेक गणमान्य शिक्षाविद भी मौजूद रहे।


➡ उत्तराखंड में संस्कृत को समर्पित यह नई पहल आने वाले समय में राज्य को सांस्कृतिक और शैक्षणिक दृष्टि से नई ऊंचाइयों तक ले जाने का मार्ग प्रशस्त करेगी।

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