देवप्रयाग/देहरादून ,
उत्तराखंड की महत्वाकांक्षी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल संपर्क परियोजना के तहत देवप्रयाग और जनासू के बीच बन रही एक सुरंग का कार्य 29 जून को सफलतापूर्वक पूरा हो गया। इस उपलब्धि के साथ ही निर्माण कंपनी लार्सन एंड टूब्रो (L&T) ने सुरंग निर्माण के क्षेत्र में एक नया विश्व रिकॉर्ड कायम कर दिया है।
🚇 शिव टीबीएम ने रचा इतिहास
कंपनी द्वारा सिंगल-शील्ड हार्ड रॉक टनल बोरिंग मशीन ‘शिव’ का उपयोग करते हुए केवल 31 दिनों में 790 मीटर लंबी सुरंग बनाकर रिकॉर्ड दर्ज किया गया।
एलएंडटी लिमिटेड के निदेशक एस.वी. देसाई ने इसे “टनलिंग इंजीनियरिंग में एक ऐतिहासिक उपलब्धि” करार दिया।
🗣 एस.वी. देसाई: “दुनिया में पहली बार इतनी जटिल भौगोलिक परिस्थितियों में ‘सिंगल-शील्ड हार्ड रॉक टीबीएम’ का इतना कुशल उपयोग किया गया है।”
📈 परियोजना की स्थिति और विशेषताएं:
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13.09 किमी लंबी डाउनलाइन सुरंग का कार्य 29 जून को ‘शिव’ टीबीएम द्वारा समय से एक दिन पहले पूरा किया गया।
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समानांतर 14.57 किमी अपलाइन सुरंग का निर्माण ‘शक्ति’ नामक टीबीएम ने 16 अप्रैल को तय समय से 12 दिन पहले संपन्न किया था।
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दोनों सुरंगों की कुल लंबाई 30 किमी है, जो देश की सबसे लंबी दोहरी परिवहन सुरंगें हैं।
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सुरंग निर्माण का 70% कार्य (21 किमी) टीबीएम के जरिए और 30% कार्य (9 किमी) ब्लास्टिंग व पारंपरिक विधियों से पूरा किया गया।
📌 परियोजना से जुड़े प्रमुख तथ्य:
| विवरण | आंकड़े |
|---|---|
| परियोजना कुल लंबाई | 125 किलोमीटर |
| सुरंगों की कुल लंबाई | 30 किलोमीटर |
| टीबीएम से पूरा किया गया कार्य | 21 किलोमीटर (70%) |
| ब्लास्टिंग से पूरा किया गया कार्य | 9 किलोमीटर (30%) |
| डाउनलाइन सुरंग की लंबाई | 13.09 किलोमीटर |
| अपलाइन सुरंग की लंबाई | 14.57 किलोमीटर |
| चालू होने की संभावित तिथि | दिसंबर 2026 |
🛤 रेल संपर्क का महत्व:
यह रेल परियोजना उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में परिवहन के लिए एक जीवंत क्रांति मानी जा रही है। ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक रेल मार्ग पूरा होने से चारधाम यात्रा, स्थानीय व्यापार, पर्यटन और आपदा राहत में बेहद सकारात्मक बदलाव आएंगे।
🗣 परियोजना निदेशक राकेश अरोड़ा: “सुरंग निर्माण की यह प्रगति समयबद्धता, आधुनिक तकनीक और टीम वर्क का प्रतीक है। यह रिकॉर्ड पूरे देश के लिए गर्व की बात है।”
