उत्तराखंड में मेडिकल फैकल्टी के लिए बनेगी अलग स्थानांतरण नीति: डॉ. धन सिंह रावत – uttarakhandawaaz.in

उत्तराखंड में मेडिकल फैकल्टी के लिए बनेगी अलग स्थानांतरण नीति: डॉ. धन सिंह रावत

राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस पर राज्य सरकार का बड़ा ऐलान, पर्वतीय क्षेत्रों में तैनात डॉक्टरों के मानदेय में भी होगी वृद्धि

देहरादून, 
उत्तराखंड में मेडिकल शिक्षा विभाग से जुड़ी फैकल्टी को जल्द ही अलग स्थानांतरण नीति मिलने जा रही है। यह घोषणा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में आयोजित ‘डॉक्टर ऑफ द ईयर अवार्ड-2025’ कार्यक्रम में की। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार चिकित्सा क्षेत्र में ढांचागत विकास और मानव संसाधन की मजबूती के लिए कई कदम उठा रही है।

✅ स्थानांतरण नीति होगी पारदर्शी और मेडिकल फैकल्टी केंद्रित

डॉ. रावत ने कहा कि राजकीय मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत फैकल्टी के लिए जल्द पृथक स्थानांतरण नीति लाई जाएगी, जिससे कार्मिकों को भ्रम या भेदभाव का सामना न करना पड़े। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर पहलू का गहन अध्ययन कर पारदर्शी नीति तैयार की जाए।

✅ शत-प्रतिशत पदोन्नति और रिक्तियों को भरने का वादा

स्वास्थ्य मंत्री ने आश्वासन दिया कि विभाग में लंबे समय से रिक्त पदों को जल्द भरा जाएगा, और सभी योग्य कार्मिकों को पदोन्नति का लाभ भी मिलेगा। इसके अलावा नए पदों का सृजन भी आईपीएचएस मानकों के तहत किया जाएगा।

✅ पर्वतीय क्षेत्रों में तैनात डॉक्टरों को मिलेगा अधिक मानदेय

राज्य सरकार दूरस्थ व दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं देने वाले डॉक्टरों के लिए मानदेय में वृद्धि करने जा रही है। डॉ. रावत ने कहा कि इससे चिकित्सकों को पर्वतीय क्षेत्रों में सेवा देने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा, और राज्य में मजबूत हेल्थ नेटवर्क विकसित हो सकेगा।

✅ आधुनिक उपकरणों और संसाधनों से होगा अस्पतालों का सशक्तिकरण

सरकार राजकीय मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित कर रही है। विशेषज्ञ डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल और तकनीकी स्टाफ की नियुक्तियों पर भी तेजी से काम किया जा रहा है।


🏅 चिकित्सकों का हुआ सम्मान

कार्यक्रम के दौरान चिकित्सा सेवा में उत्कृष्ट योगदान देने वाले चिकित्सकों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर एचएनबी मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. ओंकार सिंह, आयुर्वेद यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. अरुण त्रिपाठी, निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. आशुतोष सयाना, और प्राचार्य डॉ. गीता जैन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी, प्रोफेशनल्स और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।


📌 निष्कर्ष:
राज्य सरकार का यह कदम मेडिकल फैकल्टी की कार्यदशा सुधारने, पर्वतीय क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने, और चिकित्सा शिक्षा को सुदृढ़ बनाने की दिशा में बड़ा फैसला माना जा रहा है। नई स्थानांतरण नीति लागू होते ही मेडिकल विभाग में पारदर्शिता और स्थायित्व को लेकर एक नई शुरुआत होगी।

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