रुद्रप्रयाग में भूस्खलन से सोनप्रयाग-गौरीकुंड मार्ग बाधित, बदरीनाथ में अलकनंदा का जलस्तर बढ़ा

देहरादून/रुद्रप्रयाग/चमोली, 
उत्तराखंड में मानसून की सक्रियता ने एक बार फिर चारधाम यात्रा को प्रभावित किया है। रविवार सुबह रुद्रप्रयाग जनपद में सोनप्रयाग-गौरीकुंड मार्ग पर भूस्खलन होने के कारण वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई। वहीं, चमोली जिले में बदरीनाथ धाम के पास अलकनंदा नदी के जलस्तर में अचानक वृद्धि के चलते प्रशासन ने श्रद्धालुओं को तट से दूर रहने की चेतावनी जारी की है।

🚧 सोनप्रयाग-गौरीकुंड मार्ग बाधित

रविवार तड़के मुनकटिया क्षेत्र में भारी बारिश के बाद भूस्खलन से मलबा सड़क पर आ गया, जिससे मार्ग अवरुद्ध हो गया। जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाने का कार्य जारी है। प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनज़र श्रद्धालुओं को सोनप्रयाग और गौरीकुंड में ही रोका है।
हालांकि, पुलिस ने बताया कि मार्ग को पैदल चलने लायक बना दिया गया है, लेकिन केदारनाथ धाम तक पहुंचने के लिए छह किलोमीटर अतिरिक्त दूरी पैदल तय करनी पड़ रही है।

🥾 गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग भी चुनौतीपूर्ण

लगातार बारिश के कारण गौरीकुंड से केदारनाथ तक का पैदल मार्ग फिसलन भरा और जोखिमपूर्ण हो गया है। प्रशासन ने यात्रियों से मौसम पूर्वानुमान को ध्यान में रखकर यात्रा करने और पुलिस-प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।


🌊 बदरीनाथ में अलकनंदा का बढ़ता जलस्तर बना चिंता का विषय

बदरीनाथ मंदिर की तलहटी, विशेषकर ब्रह्म कपाल और नारद कुंड क्षेत्र में अलकनंदा नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया है। इसके पीछे लगातार वर्षा के साथ-साथ ‘रिवरफ्रंट’ महायोजना के अंतर्गत नदी के समीप मलबा डाले जाने को भी कारण माना जा रहा है।

पुलिस ने बताया कि क्षेत्र में अचानक मौसम बदलने से नदी का प्रवाह तेज हो गया है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से तीर्थयात्रियों को तटीय क्षेत्रों से दूर रहने की सख्त हिदायतें दी गई हैं। मंदिर क्षेत्र में लाउडस्पीकर से घोषणाएं कर लोगों को सतर्क किया जा रहा है।


🛑 प्रशासन की अपील:

  • मौसम अपडेट देखकर ही यात्रा शुरू करें।

  • प्रशासन और पुलिस के दिशा-निर्देशों का पालन करें।

  • जोखिमपूर्ण स्थानों पर फोटो, वीडियो या स्नान करने से बचें।

  • आपातकालीन स्थिति में नजदीकी कंट्रोल रूम या हेल्पलाइन से संपर्क करें।


निष्कर्ष:
मानसून की पहली बड़ी चुनौती ने चारधाम यात्रा पर असर डालना शुरू कर दिया है। प्रशासन अलर्ट मोड पर है, लेकिन श्रद्धालुओं को भी सतर्कता और संयम बरतने की आवश्यकता है ताकि यात्रा सुरक्षित और व्यवस्थित बनी रह सके।

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