देहरादून ,
राजधानी देहरादून में ₹6,000 करोड़ लागत की रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना को लेकर नागरिकों की चिंता और सवाल लगातार तेज़ हो रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए देहरादून सिटिज़न्स फोरम ने मंगलवार को दून पुस्तकालय में एक टाउन हॉल संवाद आयोजित किया, जिसमें सरकार और नागरिकों के बीच प्रत्यक्ष संवाद की पहल हुई।
🔎 परियोजना क्या है?
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परियोजना के तहत लगभग 26 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाना है।
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यह मार्ग रिस्पना और बिंदाल नदियों के किनारे लगभग 15 मीटर ऊंचाई पर खंभों पर प्रस्तावित है।
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इसका उद्देश्य शहरी ट्रैफिक में सुगमता लाना और मसूरी के लिए एक वैकल्पिक मार्ग तैयार करना है।
परंतु विशेषज्ञों और नागरिकों का कहना है कि यह परियोजना न केवल शहर की पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करेगी बल्कि नदी पुनर्जीवन की कोशिशों को भी खतरे में डाल सकती है।
🧑🏫 तकनीकी प्रस्तुति और खुला संवाद
टाउन हॉल में:
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लोक निर्माण विभाग के कार्यकारी अभियंता जितेंद्र त्रिपाठी ने विस्तृत तकनीकी जानकारी दी।
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साथ ही, परियोजना की आधिकारिक परामर्शदाता संस्था स्पेक्ट्रम के विशेषज्ञ भी मौजूद रहे।
सत्र में इंजीनियर, डॉक्टर, वैज्ञानिक, शिक्षाविद, पर्यावरणविद, और टेक इंडस्ट्री के पेशेवर समेत 1000+ लोग उपस्थित रहे।
❗ उठे प्रमुख सवाल
प्रश्नोत्तर सत्र में भाग लेने वालों ने निम्नलिखित चिंताएं और सुझाव रखे:
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पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन (EIA) रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग।
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परियोजना का वास्तविक लागत-लाभ विश्लेषण किया जाए।
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नदी पुनर्जीवन योजनाओं को इस परियोजना से स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ाया जाए।
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परियोजना से जुड़े फैसले लेने की प्रक्रिया में नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
🗣️ फोरम की अपील
देहरादून सिटिज़न्स फोरम ने स्पष्ट कहा कि:
“इस तरह की बड़ी आधारभूत परियोजनाएं बंद कमरों में नहीं, बल्कि जनता की भागीदारी से तय होनी चाहिए।”
फोरम ने प्रशासन से यह भी मांग की कि भविष्य में इस तरह की योजनाओं में शुरुआती चरण में ही जन संवाद को शामिल किया जाए।
📝 आगे की दिशा
बैठक के अंत में कई प्रतिभागी असंतुष्ट नजर आए और परियोजना को लेकर और अधिक पारदर्शिता और विशेषज्ञ समीक्षा की मांग की गई। लोक निर्माण विभाग ने फोरम से कहा कि वे नागरिकों की प्रतिक्रिया का समेकित दस्तावेज विभाग को सौंपें ताकि उसे नीतिगत निर्णयों में शामिल किया जा सके।
📌 निष्कर्ष:
रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड कॉरिडोर फिलहाल विकास और विनाश के बीच खड़ा एक बड़ा प्रश्न बन गया है।
इस टाउन हॉल संवाद ने साबित किया कि देहरादून के नागरिक सतर्क, जागरूक और सहभागी लोकतंत्र के पक्षधर हैं।