देहरादून ,
उत्तराखंड की चारधाम यात्रा इस वर्ष रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। अब तक लगभग 32 लाख तीर्थ यात्री चारधाम यात्रा पूरी कर चुके हैं। यह न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से, बल्कि राज्य की आर्थिक गतिविधियों के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जानकारी दी कि इस बार श्रद्धालु केवल चारधाम ही नहीं, बल्कि अन्य मंदिरों व तीर्थ स्थलों का भी रुख कर रहे हैं, जिससे राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक रफ्तार देखने को मिल रही है।
📊 अब तक के पंजीकरण के आंकड़े
(चारधाम और हेमकुंड यात्रा के लिए कुल पंजीकरण: 44 लाख+)
| धाम | पंजीकरण |
|---|---|
| यमुनोत्री | 7,13,456 |
| गंगोत्री | 7,80,554 |
| केदारनाथ | 14,43,513 |
| बद्रीनाथ | 13,36,923 |
| हेमकुंड साहिब | 1,69,180 |
➡️ अब तक यात्रा पूरी कर चुके श्रद्धालु: लगभग 32 लाख
🌄 अन्य तीर्थस्थलों में दिखा प्रभाव
मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि अन्य धार्मिक स्थलों को भी प्रचारित किया जा रहा है जिससे तीर्थाटन से जुड़े क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिले। इसका सकारात्मक असर कुछ प्रमुख मंदिरों में देखने को मिला है:
🔹 कार्तिकेय स्वामी मंदिर (रुद्रप्रयाग):
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गत वर्ष: लगभग 4 लाख यात्री
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इस वर्ष जून मध्य तक: 10 लाख से अधिक
🔹 जगन्नाथ मंदिर (उत्तरकाशी):
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इस वर्ष अब तक: 25,000 यात्री
इन क्षेत्रों में होटल, ढाबे, प्रसाद विक्रेता, परिवहन जैसी सेवाओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे स्थानीय लोगों की आजीविका को सीधा लाभ मिल रहा है।
🗣️ मुख्यमंत्री का वक्तव्य:
“उत्तराखंड देवभूमि है। यहां हर देवालय का विशेष महत्व है। हमारी सरकार सभी तीर्थ स्थलों में आधारभूत सुविधाएं बढ़ाने के लिए संकल्पित है ताकि श्रद्धालुओं को सुविधा मिले और स्थानीय लोगों को रोजगार।”
— पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड
✅ विशेष निष्कर्ष:
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तीर्थाटन केवल आस्था का विषय नहीं, स्थानीय अर्थव्यवस्था का इंजन बनता जा रहा है।
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सरकार का फोकस अब वैकल्पिक तीर्थ स्थलों के विकास पर भी है, जिससे भीड़ प्रबंधन में भी राहत मिलेगी और राज्य का समावेशी विकास सुनिश्चित होगा।