देहरादून ,
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के लंबित मामलों को लेकर जिलाधिकारी सविन बंसल ने शुक्रवार को ऋषिपर्णा सभागार में एक अहम समीक्षा बैठक की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनसुनवाई प्रणाली राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में है, और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
🕰️ तीन दिन में निस्तारण का अल्टीमेटम
बैठक में जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज सभी लंबित शिकायतों का तीन कार्यदिवस में निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने टाइमबाउंड कार्रवाई पर ज़ोर देते हुए कहा कि यदि शिकायतें समय से हल नहीं हुईं, तो कार्रवाई के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
“सीएम हेल्पलाइन सिर्फ एक सिस्टम नहीं, ये उस आम जन की उम्मीद है जो सरकारी दफ्तरों की चौखट पर जवाब की तलाश में पहुंचता है।”
— डीएम सविन बंसल
📊 विभागवार लंबित शिकायतों का ब्योरा
बैठक में सामने आए आँकड़ों के अनुसार कई विभागों में शिकायतों की संख्या चिंताजनक है:
| विभाग | लंबित शिकायतें |
|---|---|
| पुलिस | 478 |
| यूपीसीएल | 361 |
| लोक निर्माण विभाग | 252 |
| जल संस्थान | 276 |
| नगर निगम | 244 |
| आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय | 229 |
| शहरी क्षेत्र विकास एजेंसी | 204 |
| आयुष्मान योजना | 198 |
| यूटीयू | 145 |
| भू-अभिलेख | 88 |
| पेयजल निगम | 84 |
| एमडीडीए | 78 |
(पूर्ण सूची ऊपर के स्रोत में)
📞 फीडबैक कॉल और समाधान की गुणवत्ता पर भी ज़ोर
डीएम ने कहा कि सिर्फ शिकायतें ‘निस्तारित’ दिखाना काफी नहीं है, बल्कि फीडबैक कॉल के ज़रिए यह सुनिश्चित करना होगा कि समाधान जनसंतोषजनक रहा है या नहीं। बार-बार आने वाली समस्याओं पर स्थायी समाधान निकालने की भी सख्त हिदायत दी गई।
🌐 तकनीकी दक्षता बढ़ाने पर बल
डीएम बंसल ने कहा कि शासन प्रणाली में डिजिटल परिवर्तन तेज़ी से हो रहा है। ऐसे में सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को तकनीकी रूप से अपडेट रहना अनिवार्य है। उन्होंने कहा, “अब सारी सेवाएं ऑनलाइन पोर्टल्स के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही हैं, तकनीकी समझ ही अब प्रशासन की रीढ़ है।”
🧑⚖️ बैठक में मौजूद रहे अधिकारीगण
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, प्रभागीय वनाधिकारी नीरज शर्मा, एडीएम (वित्त व राजस्व) के.के मिश्रा, उप नगर आयुक्त गोपालराम बिनवाल, मुख्य शिक्षा अधिकारी विनोद ढौंडियाल, डॉ. राजीव दीक्षित, और संबंधित विभागों के अधीक्षण अभियंता उपस्थित रहे।
राज्य सरकार की “गुड गवर्नेंस” की दिशा में सीएम हेल्पलाइन एक प्रभावी मंच है, लेकिन इसकी विश्वसनीयता तभी बनी रह सकती है जब अधिकारी संवेदनशीलता, तेजी, और ईमानदारी से काम करें। डीएम की सख्ती के बाद अब देखना है कि आने वाले दिनों में शिकायतों के निस्तारण में कितनी प्रभावशीलता आती है।