देहरादून ,
जिला तम्बाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ देहरादून द्वारा मंगलवार को सहसपुर स्थित दून स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज में तम्बाकू नियंत्रण एवं जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में तम्बाकू उत्पादों के सेवन से शरीर पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के बारे में छात्र/छात्राओं को जागरूक किया गया। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा तम्बाकू निषेध अभियान हेतु निर्धारित थीम – तम्बाकू उद्योग के हस्तक्षेप से बच्चों का बचाव- की वृहद जानकारी युवाओं को दी गयी।
कार्यशाला में डॉ0 अनुराधा, साइकोलॉजिस्ट द्वारा तम्बाकू उत्पादों के उपभोग से शरीर पर होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दी गयी। उन्होंने बताया कि तम्बाकू सेवन से कई प्रकार के रोग हो सकते हैं, जिनमें प्रमुख रोग कैंसर है। देश में प्रतिवर्ष कई लोग तम्बाकू उत्पादों के सेवन से जान गंवाते हैं। कार्यशाला के दौरान बच्चों को संदेश दिया गया कि तम्बाकू सेवन के कारण होने वाली मौतों से तम्बाकू उत्पाद कम्पनियों के ग्राहक घट जाते हैं। जिसके उपरांत तम्बाकू कम्पनियां किशोरों, बच्चों तथा युवाओं को अपने उत्पादों के प्रति आकर्षित करने के नए नए तरीके अपनाते हैं। युवाओं को इस षडयंत्र को समझना होगा और तम्बाकू उत्पादों से दूर रहना होगा।
जिला सलाहकार अर्चना उनियाल द्वारा विद्यार्थियों को कोटपा अधिनियम एवं उसके अंतर्गत विभिन्न धाराओं व दण्ड के बारे में विस्तृत जानकारी दी गयी। जानकारी दी गयी कि शैक्षिक संस्थानों में 100 गज की परिधि में तम्बाकू की बिक्री पर प्रतिबंध है। उल्लंघन करने पर 200 रुपए का जुर्माना है। यदि कोई युवा तम्बाकू के चंगुल में फंस चुका है और तम्बाकू छोड़ना चाहता है तो वह गांधी शताब्दी चिकित्सालय, देहरादून में स्थापित तम्बाकू उन्मूलन केन्द्र में साइकोलॉजिस्ट से निःशुल्क परामर्श तथा फार्माकोथैरेपी की सेवाएं ले सकते हैं।
कार्यशाला में विद्यार्थियों द्वारा तम्बाकू दुष्परिणामों के विषय पर पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में दीक्षा ने प्रथम, स्नेहा ने द्वितीय, तथा खुशी सैनी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। प्रतिभाग करने वाले समस्त छात्र/छात्राओं को जिला तम्बाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ की ओर से प्रमाण पत्र दिये गये।
इस अवसर पर संस्थान को कोटपा अधिनियम तथा तम्बाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान गाइडलाइन के अनुसार तम्बाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान घोषित किया गया। कार्यशाला में संस्थान की प्रधानाचार्य प्रो0 अर्चना मसीह, मनोवैज्ञानिक डॉ अनुराधा, जिला सलाहकार अर्चना उनियाल, प्रोग्राम समन्वय मोहित नौटियाल, चंद्रकीर्ति नेगी, रेखा उनियाल, आदि उपस्थित रहे।