केन्द्र सरकार पर श्रमिक और किसान विरोधी होने का लगाया आरोप
देहरादून ,
केन्द्र सरकार की जन विरोधी एवं श्रम विरोधी नीतियों के विरोध में केन्द्रीय ट्रेड यूनियन एवं संयुक्त किसान मंच के आह्नान पर आज राष्ट्रव्यापी हड़ताल रही। राष्ट्रव्यापी हड़ताल को विभिन्न ट्रेड यूनियनों ने अपना समर्थन दिया और हड़ताल के चलते हुए राजधानी में रैली निकाली गई। यहां उत्तराखण्ड संयुक्त ट्रेड यूनियन्स संघर्ष समिति के बैनर तले केन्द्र सरकार की जन विरोधी एवं श्रम विरोधी नीतियों के विरोध में केन्द्रीय ट्रेड यूनियन एवं संयुक्त किसान मंच के आह्नान पर आज राष्ट्रव्यापी हड़ताल रही, वहीं राजधानी में रैली निकालकर मजदूरों, किसानों व आम जनता से अपील की गई थी। इस अवसर पर इंटक के प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट ने कहा कि केन्द्र की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार व उत्तराखण्ड की भाजपा सरकार मेहनतकश लोगों के जीवन और आजीविका पर बर्बर हमले कर रही है और विभिन्न कानूनों, आध्यादेशों और नीतिगत अभियानों के माध्यम से आक्रमक रूप से श्रमिक विरोधी-किसान विरोधी और जन विरोधी कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि यह सरकारें राजव्यवस्था और सवैधानिक संस्थाओं का साम्प्रदायिकरण कर रही है तथा योन उत्पीड़न के दोषियों के आरोपी अपराधियों को बचा रही है, परिणामस्वरूप कानून और व्यवस्था पर से लोगों का भरोसा उठता जा रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्षी 146 सांसदों को निलम्बित कर सरकार के द्वारा हाल ही में चालकों व जन विरोधी काला कानून मोटर वाहन अधिनियम 2023 को संसद में विपक्ष की अनुपस्थिति में पारित किया गया है। उन्होंने कहा कि जिसके तहत दुर्घटना के पश्चात सात साल की सजा व 10 लाख रूपये जुर्माना होगा जिसका सर्वत्र विरोध किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस केन्द्र सरकार के द्वारा कोरोना संक्रमण काल में जब दुनिया में त्राही त्राही मची थी 2020 में आपदा को अवसर में बदलते हुए 44 श्रम कानूनों में से 29 श्रम कानूनों को समाप्त किया गया तथा मालिकों व पूँजीपतियों के हितों में चार श्रम सहिताएं बनायी गयी हैं, जिससे मजदूर वर्ग को गुलामी की ओर धकेला जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार के द्वारा सार्वजनिक सम्पत्तियों को बड़ी ही चालाकी से पूंजीपतियों को कौड़ी के भाव से बेच रही है जिसका पुरजोर विरोध किया जायेगा। उन्होंने कहा कि इन मजदूर, किसान व जनविरोधी फैसलों को तत्काल वापस लेने हेतु केन्द्र सरकार को निर्देशित करें। उन्होंने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम 2023 को तत्काल प्रभाव से रद्द करो। उन्होंने कहा कि 29 श्रम कानूनों के स्थान पर लायी गयी चारों श्रम सहिताओं के साथ 12 घंटे काम करने के आदेश को रद्द करो। उन्होंने कहा कि न्यूनतम वेतन 26 हजार रूपये मासिक घोषित करो तथा न्यूनतम वेतन बोर्ड, उत्तराखण्ड कर्मचारी भविष्य निधि बोर्ड में केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों सीटू, इंटक एवं ऐटक के प्रतिनिधियों को रखा जाये। उन्होंने कहा कि किसानों के हितों के लिए एमएसपी पर कानून बनाया जाए, बिजली बिल 2022 वापस लिया जाए, स्मार्ट मीटर लगाने के फैसले को वापस लो। उन्होंने कहा कि बैंक, बीमा, रक्षा, पोस्टल, रेलवे सहित अन्य सार्वजनिक संस्थानों का निगमीकरण व निजीकरण पर रोक लगायी जाए। उन्होंने कहा कि आयुध निर्माणियों को पूर्व की भाति सरकार के अधिकार में वापस लिया जाये। उन्होंने कहा कि बढ़ती मंहगाई पर रोक लगायी जाये व गैस, पैट्रोल, डीजल के दामों में बेहतहाशा मूल्य वृद्धि को वापस लिया जाए। इस अवसर पर अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता शामिल रहे।