प्राणिमात्र से प्रेम करना महादेव से सीखें: स्वामी रसिक महाराज – uttarakhandawaaz.in

प्राणिमात्र से प्रेम करना महादेव से सीखें: स्वामी रसिक महाराज

देहरादून ,

देहरादून के क्लेमेंटाउन स्थित नवदुर्गा मंदिर में चल रही शिवमहापुराण कथा में मंगलवार को नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज ने शिव के universal acceptance और करुणा पर आधारित जीवन को जीवन का आदर्श बताया। उन्होंने कहा कि भगवान शिव का जीवन समर्पण, प्रेम और समता का संदेश देता है, जिसे आज के समाज को आत्मसात करने की आवश्यकता है।

“सबका सम्मान करें, सबमें शिव देखें”

स्वामी रसिक महाराज ने कहा कि:

“यदि तिरस्कृतों, उपेक्षितों और परित्यक्तों के लिए आपके हृदय में प्रेम है, तो आप वास्तव में भगवान शिव के अनुयायी हैं।”

उन्होंने शिवजी के जीवन से उदाहरण देते हुए कहा कि धतूरा, भाँग, आक जैसी दुर्गंधयुक्त वस्तुएँ, सर्प जैसे जहरीले जीव, और भूत-प्रेतों तक को महादेव ने अपने गले लगाया। उनका जीवन समाज से उपेक्षित हर जीव और वस्तु को स्वीकारने का प्रतीक है। यही कारण है कि शिवजी को विभूतियों का स्वामी कहा गया है।

प्रेम और समर्पण ही शिव बनने का मार्ग

स्वामी जी ने कहा:

“प्राणिमात्र से प्रेम और उनका हित ही शिव बनने का एकमात्र मार्ग है।”
“सम्मान देने से ही सम्मान प्राप्त होता है।”
“शिव वह हैं जो सबको अपनाते हैं, और हमें भी यही मार्ग अपनाना चाहिए।”

सामाजिक सद्भाव का संदेश

स्वामी रसिक महाराज के उद्बोधन ने समाज में समता, करुणा और सहिष्णुता को बढ़ावा देने का संदेश दिया। कथा के माध्यम से उन्होंने यह स्पष्ट किया कि धर्म केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि व्यवहार में प्रेम और सम्मान है।


विशिष्टजन रहे उपस्थित

इस अवसर पर कई विशिष्ट लोग कथा श्रवण हेतु उपस्थित रहे। इनमें प्रमुख रूप से:

  • धर्मपुर विधायक विनोद चमोली की धर्मपत्नी श्रीमती शशि चमोली

  • नगर निगम पार्षद पुष्कर चौहान

  • साध्वी माँ देवेश्वरी, मंजू कोटनाला, चतर सिंह नेगी, श्रीमती लीला देवी

  • आचार्य संजय डोबरियाल, पं. मुकेश नौडियाल, पं. रवि जोशी,

  • सम्पूर्णानन्द मुण्डेपी, विनोद अग्रवाल, सरोज थपलियाल, कांति देवी सहित

  • बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन मौजूद रहे।


निष्कर्ष

शिवमहापुराण कथा न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण रही, बल्कि स्वामी रसिक महाराज के उद्बोधन ने सामाजिक समरसता और करुणा आधारित जीवनशैली को अपनाने की प्रेरणा दी।
प्रेम, स्वीकार्यता और सेवा — यही शिवत्व है।

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