राष्ट्रपति को पत्र लिखकर अनुच्छेद 67(a) के तहत पद छोड़ने की घोषणा
नई दिल्ली ,
भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने आज तत्काल प्रभाव से अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने यह निर्णय स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए लिया और अपना इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपा।
धनखड़ का पत्र — “स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने का समय”
राष्ट्रपति को संबोधित अपने पत्र में जगदीप धनखड़ ने लिखा:
“स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देने और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने के लिए मैं भारत के उपराष्ट्रपति पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देता हूं।”
उन्होंने आगे कहा कि उपराष्ट्रपति के रूप में बिताया समय उनके जीवन का अमूल्य अनुभव रहा। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संसद के सभी माननीय सदस्यों का आभार व्यक्त किया।
मानसून सत्र के पहले दिन दी थी सदन में सौहार्द की अपील
दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने मानसून सत्र 2025 के पहले ही दिन, यानी आज सुबह, राज्यसभा में सभी राजनीतिक दलों से सदन में सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखने की अपील की थी।
धनखड़ ने कहा था:
“राजनीति का सार टकराव नहीं, संवाद है। सभी दलों का लक्ष्य अंततः राष्ट्रहित ही होता है।”
राजनीतिक जीवन की झलक — किसान के बेटे से उपराष्ट्रपति तक
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जगदीप धनखड़ ने 6 अगस्त 2022 को भारत के 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी।
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वह किसान परिवार से आने वाले नेता हैं और अक्सर अपनी पृष्ठभूमि का उल्लेख कर सदन में मजबूती से अपनी बात रखते थे।
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दिसंबर 2024 में विपक्षी हंगामे के दौरान उनका बयान —
“मैं किसान का बेटा हूं, कमजोरी नहीं दिखाऊंगा, देश के लिए मर जाऊंगा” —
उनके कार्यकाल की उल्लेखनीय झलकियों में से एक रहा है।
धनखड़ के इस्तीफे के बाद अब उपराष्ट्रपति पद के लिए नए नाम की तलाश शुरू होगी। चूंकि उपराष्ट्रपति राज्यसभा के सभापति भी होते हैं, इसलिए सदन में इस पद के प्रभाव का तत्काल असर देखने को मिलेगा।
